बड़ों का सत्कार और उनकी आज्ञा का पालन ही सच्चे अर्थों में यज्ञ : आचार्य वेदपाल

माई सिटी रिपोर्टर सोनीपत। जो व्यक्ति बड़ों का सत्कार और उनकी आज्ञा का पालन करता है वही सच्चे अर्थों में यज्ञ करता है। जो व्यक्ति ओदन अर्थात यज्ञीय भावना को जीवन में धारण करता है, उसे आत्मसात करता है वहीं स्वर्ग का सुख प्राप्त करता है। यह विचार वैदिक यज्ञ समिति के 47वें वार्षिकोत्सव के तीसरे दिन बुधवार की सुबह की सभा में आचार्य वेदपाल ने यज्ञ और उसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए व्यक्त किए ।आचार्य अंकित ने कहा कि भगवान ने मनुष्य को विशेष रूप से इस संसार में भेजा है और संपूर्ण सृष्टि मानव कल्याण के लिए बनाई है। उन्होंने बताया कि अन्य सभी प्राणी भी मानव की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। आचार्य प्रदीप ने ईश्वर और महर्षि दयानंद की महिमा का गायन किया। वेदपाठी ब्रह्मचारिणियों के मंत्रोच्चारण और उनकी गति से उपस्थित लोग प्रभावित हुए। यज्ञ का संचालन आचार्य दीक्षा आर्य ने किया। कार्यक्रम में रामगोपाल भूटानी, युधिष्ठिर गुगलानी, अशोक आर्य, पंकज बत्रा, अनीता चावला, सुमन चावला, मीनाक्षी मदन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 25, 2026, 18:19 IST
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