Rare Disease Day: मरीजों में दुर्लभ बीमारियों की जानकारी की कमी, खतरा ज्यादा

हिमाचल प्रदेश के अधिकांश मरीजों में दुर्लभ रोग के बारे में जानकारी का बहुत अभाव है। मरीजों को तब पता चलता है, जब वह किसी दूसरी बीमारी का इलाज करवाने के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। हालांकि, यह दुर्लभ रोग बहुत कम लोगों में पाए जाते हैं। 70 से 80 फीसदी दुर्लभ रोग जीन में बदलाव के कारण होते हैं। कई मामलों में इन बीमारियों के लक्षण जन्म के समय या कम उम्र में दिखाई देते हैं। यह बीमारी संक्रामक नहीं है। यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे को नहीं जाते हैं। दुर्लभ बीमारियों में थैलेसीमिया, सिस्टिक फाइब्रोसिस, हीमोफिलया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी शामिल हैं। भारत में 28 फरवरी को दुर्लभ रोग दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद यह है कि लोग इस बीमारी के प्रति जागरूक हों। यह रोग भले ही दुर्लभ हों या कम लोगों को प्रभावित करते हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए यह गंभीर और जीवनभर की चुनौती बन जाती है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 27, 2026, 19:08 IST
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