जयपुर निकाय चुनाव: नाम वापसी के बाद तस्वीर साफ, 2,644 मैदान में; शाहपुरा, बस्सी और चौमूं में कड़ा मुकाबला

जयपुर। जयपुर जिले के 19 नगरीय निकायों में नाम वापसी के बाद अब चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है। 690 वार्डों में पार्षद पद के लिए 2,644 प्रत्याशी मैदान में हैं। अब शुक्रवार को चुनाव चिह्नों के आवंटन के साथ ही स्थानीय चुनाव का सियासी रंग और गहरा जाएगा। नामांकन के दौरान कुल 4,868 पर्चे दाखिल किए गए थे। संवीक्षा में 1,382 नामांकन खारिज हुए और 3,486 नामांकन वैध पाए गए। इनमें से 714 प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिया। तीन प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। सबसे बड़ी लड़ाई जयपुर नगर निगम में जिले के निकायों में सबसे ज्यादा राजनीतिक गतिविधियां जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में देखने को मिलेंगी। यहां नाम वापसी के बाद 723 प्रत्याशी मैदान में हैं। यानी राजधानी के हर वार्ड में औसतन कई उम्मीदवार आमने-सामने होंगे। बीजेपी और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के अलावा निर्दलीय और अन्य दलों के उम्मीदवार मुकाबले को कई जगह त्रिकोणीय और बहुकोणीय बना सकते हैं। नाम वापसी से किसका कितना नुकसान नाम वापसी के आंकड़े भी चुनावी राजनीति की तस्वीर दिखाते हैं। जयपुर नगर निगम से सबसे ज्यादा 281 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिया। शाहपुरा नगर परिषदमें 78 और चाकसूपरिषद में 74 प्रत्याशियों ने अपनी उम्मीदवारी वापस ली। इसी तरह नगर परिषदों मेंचौमूं से 22, बगरू से 18, बस्सी से 14, दूदू से 23, जमवारामगढ़ से 16, जोबनेर से 14, कालाडेरा से 14 और मनोहरपुर से 27 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए। किशनगढ़-रेनवाल में 15, फागी में 28, फुलेरा में 20 और सांभर में 17 प्रत्याशियों ने भी चुनावी दौड़ से कदम पीछे खींचे। यह भी पढें-भीलवाड़ा:निर्दलीय को चुनाव से हटने के लिए दिया लालच, घर में रखे एक लाख रुपये, भाजपा प्रत्याशी पर गंभीर आरोप बागियों का गणित सबसे अहम नाम वापसी के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि कितने बागी मैदान में रह गए हैं। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों ने कई जगह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था। नाम वापसी के लिए दोनों दलों ने अपने स्तर पर नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने की कोशिश की। जिन बागियों ने नाम वापस ले लिया, वहां पार्टी उम्मीदवारों को राहत मिली है। लेकिन जो मैदान में टिके हैं, वे करीबी मुकाबले वाले वार्डों में जीत-हार का गणित बदल सकते हैं। निकाय चुनाव में अक्सर कुछ सौ या उससे भी कम वोटों से हार-जीत होती है। ऐसे में बागी प्रत्याशी को मिलने वाले वोट सीधे तौर पर बीजेपी या कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। शाहपुरा, बस्सी और चौमूं में भी कड़ा मुकाबला जयपुर नगर निगम के बाद शाहपुरा में 247, बस्सी में 164 और चाकसू में 136 प्रत्याशी मैदान में हैं। चौमूं और बगरू में 119-119 उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा दूदू में 99, जमवारामगढ़ में 96, जोबनेर में 80, कालाडेरा में 65, कानोता में 66, खेजरोली में 88 और किशनगढ़-रेनवाल में 100 प्रत्याशी मैदान में हैं। मनोहरपुर में 120, नारायणा में 88, फागी में 85, फुलेरा में 77, सांभर में 88 और वाटिका में 84 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। अब चुनाव चिह्न और प्रचार पर जोर नाम वापसी की प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब राजनीतिक दलों का पूरा फोकस प्रचार अभियान पर होगा। 4 सितंबर को चुनाव चिह्नों का आवंटन किया जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी खुलकर प्रचार में उतरेंगे। बीजेपी और कांग्रेस के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ मतदाताओं तक पहुंच बनाना और दूसरी तरफ अपने ही संगठन के नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ रखना। जयपुर जिले के 690 वार्डों में 2,644 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ बीजेपी बनाम कांग्रेस की लड़ाई नहीं रहेगा। कई वार्डों में निर्दलीय और बागी प्रत्याशी मुकाबले की दिशा तय कर सकते हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 03, 2026, 20:10 IST
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