दूर होगी नौकरशाही की दिक्कतें: एमका की कमान निजी हाथों में देने की तैयारी, नौसेना को समय पर मिलेंगे फाइटर जेट?

भारत के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एमका) परियोजना की कमान सार्वजनिक क्षेत्र की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. (एचएएल) के बजाय निजी क्षेत्र के हाथों में सौंपे जाने की तैयारी है। इस रणनीतिक फैसले का प्रमुख कारण यह भी है कि एचएएल अपने तेजस मार्क 1ए जैसे भारी-भरकम ऑर्डर समय पर पूरा कर सके। एमका को निजी हाथों में सौंपने से आपूर्ति में लगने वाला समय कम हो सकता है। रक्षा मंत्रालय की तकनीकी समिति ने एमका परियोजना के लिए तीन निजी कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लि., लार्सन एंड टूब्रो और भारत फोर्ज शामिल हैं। इस निर्णय को भारत के रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक पहला प्रोटोटाइप और 2035 तक एमका का उत्पादन शुरू करने का है। निजी कंपनियों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला तक सीधी पहुंच, सरकारी लेटलतीफी कम करेगी। इससे विमान की आपूर्ति समय से पहले होने की उम्मीद है। निजी कंपनियां विदेशी इंजन निर्माताओं के साथ उपक्रम लगाने में ज्यादा लचीली होती हैं। हालांकि, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की स्टील्थ तकनीक और इंजन निर्माण बड़ी तकनीकी चुनौती है। टीएएसएल के पास कई बड़े अनुभव टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लि. (टीएएसएल) के पास लॉकहीड मार्टिन जैसे वैश्विक विमानन दिग्गजों के साथ काम करने का अनुभव है। यह कंपनी फिलहाल बोइंग और लॉकहीड मार्टिन के लिए लड़ाकू विमानों के ढांचे बना रही है। कंपनी के पास सी-295 एयर क्राफ्ट की पूरी असेंबली लाइन बनाने की क्षमता भी है। इधर, एल एंड टी के पास परमाणु पनडुब्बियों व मिसाइल प्रणालियों की जटिल संरचना और इंजीनियरिंग का अनुभव है। कल्याणी समूह की भारत फोर्ज वैश्विक स्तर पर फोर्जिंग और उच्च-ग्रेड धातुओं की विशेषज्ञ है। यह विशेषता इंजन और एयरफ्रेम के अन्य हिस्सों के लिए जरूरी है। एचएएल ने कहा-हमारी ऑर्डर बुक मजबूत एमका के निर्माण के लिए न चुने जाने पर एचएएल ने कहा है कि उसकी ऑर्डर बुक मजबूत है और कंपनी के पास साल 2032 तक हथियार प्रणालियों का उत्पादन करने की स्पष्ट तैयारी है। कंपनी कई रणनीतिक परियोजनाओं पर काम कर रही है। इनमें इंडियन मल्टी रोल हेलिकॉप्टर, एलसीए मार्क-2 और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम शामिल हैं। दरअसल, नियमानुसार किसी कंपनी की ऑर्डर बुक उसके राजस्व से तीन गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए, जबकि एचएएल की ऑर्डर बुक उसके राजस्व से लगभग आठ गुना (2 लाख करोड़) अधिक है। साथ ही सरकार एचएएल का एकाधिकार खत्म कर एक प्रतिस्पर्धी वातावरण बनाना चाहती है। इस खबर के बाद बुधवार को एचएएल के शेयरों में काफी गिरावट देखने को मिली। अन्य वीडियो

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 05, 2026, 03:56 IST
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