Kaithal News: गोष्ठी में कवियों ने रचनाओं से बांधा समां

कैथल। साहित्य सभा कैथल की अप्रैल मास की काव्य-गोष्ठी का आयोजन रविवार को आरकेएसडी कॉलेज में किया गया। काव्य-गोष्ठी का संचालन हरियाणवी और हिंदी के साहित्यकार एवं सभा के कोषाध्यक्ष रिसाल जांगड़ा ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ राज बेमिसाल की ओर से उनके अनुभव पर आधारित संस्मरण से हुआ। इस दौरान कवियों ने रचनाएं सुनाकर समां बांध दिया।सुरेश कुमार कल्याण ने कहा - धन के मद मदहोश हो, कर काली करतूत। झोंक जगत को जंग में, गायब करे सबूत। अनिल गर्ग धनौरी ने कहा : एक कमी सै बस मेरी लुगाई मैं। कणक काटण के टेम पै, रूस कै चली जा सै, बुलाकै अपणै भाई नै। अंधेरे का मनोविज्ञान समझाते हुए राजेश भारती ने कहा : जो लोग अंधेरे में रहते हैं, उन लोगों की आंखें बड़ी हो जातीं हैं। ईश्वर की सर्व व्यापकता को लेकर सतपाल पराशर आनंद ने कहा - तेरे मेरे बीच मैं, जो रहता सो एक। मन मैं शांति धारकै देख सकै तो देख। अपने बचपन को याद करते हुए मधु गोयल मधुल ने कहा - स्मृतियों के आईने में, पन्ने बचपन के। लौट गई मैं फिर से, अपने खोये बचपन में। अमेरिका-ईरान संघर्ष के देश के आम आदमी पर पड़े असर को लेकर सतबीर सिंह जागलान ने अपनी कविताओं के माध्यम से समझाया - अमेरिका-ईरान की, जिब तै छिड़ी जंग। सिलिंडर के बिना म्हारे देस आले भी होरै सैं तंग। एक झूठे व्यक्ति का चित्रण करते हुए रविंद्र रवि ने कहा - रोकर सच्चा बन जाता है, उसकी ये हर रोज की बात है। मां का महत्व बताते हुए रजनीश शर्मा ने कहा - मां घर-बगिया की माली। उसके बिन सब खाली-खाली। डाॅ़ तेजिंद्र ने कहा - कच्ची छत, कीकर की छांव लिये फिरता हूं। मैं मन में अपना गांव लिये फिरता हूं। बच्चे को कोरी कापी बताते हुए रामफल गौड़ ने कहा - मात-पिता जो चाह्वैं लिखदैं, दिल बच्चां का कापी कोरी। सागर को माध्यम बनाकर हद पार कर रहे लोगों के बारे में ईश्वर चंद गर्ग ने कहा - कुछ समंदर हद से बाहर जा रहे हैं।प्यास की क़ीमत मेरी लगवा रहे हैं। चारों ओर पसरे झूठ को लेकर कर्म चंद केसर ने कहा : नजरें झूठ नजारा झूठ। जो कुछ देख्या सारा झूठ। युद्ध-विराम का स्वागत करते हुए प्रो़ अमृत लाल मदान ने कहा - स्वागत युद्ध-विराम। आगे भली करें श्रीराम। इनके अतिरिक्त श्याम सुंदर शर्मा गौड़, सतीश शर्मा माजरा, सोहन लाल सोनी,अनिल कौशिक, रामफल गौड़, आदि ने भी काव्य-पाठ किया। गोष्ठी के दौरान प्रो़ अमृत लाल मदान ने लघु पुस्तक-प्रदशर्नी भी आयोजित की। कर्म चंद केसर की पुस्तक गुल्लर के फूल का विमोचन भी किया गया। संवाद

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 13, 2026, 02:55 IST
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