High Court : इस्लाम धर्म कबूल करने के दबाव और पति की मौत मामले में पत्नी को राहत नहीं, जारी रहेगा मुकदमा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह के बाद विवाद और पति की मौत से जुड़े मामले में पत्नी, उसके परिजनों को राहत देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज दी। कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दिया है। कानपुर देहात निवासी अवधेश उर्फ मोनू और रोशन ने 2025 में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। अवधेश की मौत के बाद उसके परिजनों ने एफआईआर दर्ज कराई। आरोप लगाया कि रोशन के परिवार के सदस्य इस शादी से नाराज थे। अवधेश पर लगातार इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बना रहे थे। 18 जनवरी 2026 को रोशन के परिवार के कुछ सदस्यों ने अवधेश को घर से बाहर बुलाया और उसके साथ मारपीट की। इस हमले में उसे सिर पर गंभीर चोटें आईं। लंबे समय तक इलाज चलने के बाद अप्रैल 2026 को उसकी मृत्यु हो गई। आरोपी पत्नी और परिजनों ने दर्ज मुकदमे को रद्द करने की मांग में याचिका दायर की थी। आरोपी पक्ष ने दलील दी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाहरी चोटों का उल्लेख नहीं है। उनके खिलाफ आरोप निराधार हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले में गंभीर और विशिष्ट आरोप लगाए गए हैं, जिनकी गहन जांच आवश्यक है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: May 31, 2026, 14:23 IST
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