महाराष्ट्र के किसानों की अंतहीन पीड़ा: फसल से ही घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई सबकुछ होनी थी; अब कुछ नहीं बचा
पिछले पांच वर्षों में धाराशिव के औसत भूजल स्तर में करीब 7.2 मीटर की गिरावट आई है। धाराशिव जिले की सभी आठ तहसील धाराशिव, तुलजापुर, कलंब, वाशी, भूम, परंडा, लोहारा और उमरगा सूखाग्रस्त घोषित हो चुका है। धाराशिव जिले के करजखेड़ा के किसान सोपन भोसले खेत में सूखे सोयाबीन के पौधे उखाड़ रहे हैं। हाथ में पौधा है और सामने साढ़े चार एकड़ जमीन। इसी जमीन से परिवार की उम्मीदें जुड़ी हैं। पत्नी मंगल भोसले और बहू प्रतिभा के साथ खेत में खड़े बलिराम कहते हैं, सोयाबीन और गन्ने से होने वाली आमदनी से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अगले मौसम की खेती का हिसाब जुड़ा हुआ थाअब कुछ नहीं बचा। शादी पर भी संकट अविनाश कहते हैं, खेती में बढ़ती अनिश्चितता, फसल का नुकसान और कर्ज का दबाव ग्रामीण परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, खेती पर निर्भर परिवारों में युवाओं की शादी का भी संकट है। पानी की कमी का असर खेत से निकलकर सामाजिक रिश्तों तक पहुंच रहा है। अब साल भर कैसे चला पाएंगे परिवार का खर्चा काटी गांव के अविनाश देशमुख ने 15 एकड़ में सोयाबीन और एक एकड़ में प्याज लगाया था। बारिश ने साथ छोड़ा तो खेत सूख गया। अब खेत में खड़ी फसल से ज्यादा उन्हें उस पैसे की चिंता है जो पहले ही जमीन में लगाया जा चुका है। देशमुख कहते हैं कि उनके लिए फसल घर के सालभर के खर्च का आधार होती है जो नष्ट हो रही है। अविनाश और संपत पंखे का सवाल केवल यह नहीं है कि इस साल कितना नुकसान हुआ। सवाल यह है कि अगली बुआई तक परिवार कैसे चलेगा। धराशिव के एक ही तालुके में 19 किसान जान दे चुके सूखे की सबसे पीड़ादायक तस्वीर किसानों की आत्महत्याओं के आंकड़ों में दिखाई देती है। सचिन जाधव बताते हैं कि धाराशिव जिले में से एक तुलजापुर तालुका में 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 के बीच 19 किसानों ने आत्महत्या की। हर आत्महत्या के पीछे व्यक्तिगत, पारिवारिक व आर्थिक परिस्थितियां हैं। कर्नाटक में भी सूखे से हाहाकार महाराष्ट्र से इतर कर्नाटक भी सूखे का दंश झेल रहा है।उपमुख्यमंत्री ने गृह मंत्री और कृषि मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल मदद मांगी है। राज्य के 177 तालुकों में सूखे के कारण47.09 लाख हेक्टेयर फसल नष्ट हो चुकी है।राज्य के कुल तालुकों के करीब दो तिहाई भाग मेंफसल नष्ट होने से किसानों को लगभग 46,324.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार से मदद की अपील कर्नाटक के डिप्टी सीएम और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अलग पत्र लिखकर केंद्र से तुरंत मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे से लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कर्नाटक ने पहले केंद्र को खरीफ 2026 के लिए सौंपे गए ज्ञापन में सूखा प्रभावित 101 तालुकों के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग की थी। इसके बाद 76 और तालुकों को सूखा घोषित करना पड़ा। राज्य सरकार ने बताया कि अभी 40 और तालुकों में जमीनी स्तर पर जांच चल रही है। लगातार हो रहे आकलन के आधार पर, मॉनसून सीजन के आखिर तक सूखे से प्रभावित तालुकों की संख्या 220 से अधिक हो सकती है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 03, 2026, 02:37 IST
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