Bihar News: मधुबनी का बलिराजगढ़ उत्खनन मंजूर, राजा बली की प्राचीन सभ्यता पर नए सिरे से शोध की उम्मीद
मधुबनी जिले के ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल बलिराजगढ़ (राजा बली का गढ़) के अवशेषों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वैज्ञानिक उत्खनन कार्य के लिए आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। इस निर्णय से मिथिला की प्राचीन सभ्यता और इतिहास पर नए सिरे से शोध और प्रकाश पड़ने की उम्मीद है। संजय झा की पहल से मिली मंजूरी सूत्रों के अनुसार, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और ASI के महानिदेशक से लगातार संवाद किया था। इसके परिणामस्वरूप उत्खनन की मंजूरी मिली है। संजय झा परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष भी हैं और इस स्थल में छिपी सभ्यता में गहरी दिलचस्पी रखते हैं। उनका लक्ष्य इसे भविष्य में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। उत्खनन के लिए चिन्हित क्षेत्र को स्वीकृत स्थल योजना (Site Plan) में लाल रंग से दर्शाया गया है। कार्य पटना परिपथ के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. हरि ओम शरण के निर्देशन में किया जाएगा। बलिराजगढ़ मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड में स्थित है और इसे मिथिला के राजा बलि की राजधानी माना जाता है। लगभग 1 वर्ग किलोमीटर में फैले इस किलेबंदी वाले क्षेत्र में 1962 से 2014 तक की खुदाई में शुंग-कुषाण काल (लगभग 200 ईसा पूर्व) से लेकर पाल काल तक के अवशेष मिले हैं। लोकमान्यताओं के अनुसार यह असुर राजा बलि की राजधानी थी, जो दानवीर और न्यायप्रिय थे। ASI ने इस स्थल को 1938 में संरक्षित स्मारक घोषित किया था। इसे लौह युग की विदेह जनजाति की राजधानी मिथिला से भी जोड़ा जाता है। उत्खनन में मिले अवशेष खुदाई में पक्की ईंटों से बनी विशाल सुरक्षात्मक दीवार, उत्तर कृष्ण मार्जित मृदभांड (Northern Black Polished Ware), शुंग एवं कुषाणकालीन टेराकोटा मूर्तियाँ, तांबे के सिक्के, पत्थर के मनके और लोहे की वस्तुएँ मिली हैं। साथ ही पक्की नालियों के अवशेष भी मिले हैं, जो 2000 वर्ष पूर्व के उन्नत शहरी नियोजन का प्रमाण हैं। अनुसंधान और रिपोर्टिंग उत्खनन के दौरान प्राप्त सभी प्राचीन वस्तुओं की सूची संबंधित कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी। समय-समय पर जारी नियमों और निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। क्षेत्रीय कार्य पूर्ण होने के तीन माह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट महानिदेशक को प्रस्तुत की जाएगी। उत्खनन की शुरुआत और समापन की सूचना औपचारिक रूप से दी जाएगी। यह स्वीकृति पत्र जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक वैध रहेगा। बलिराजगढ़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बलिराजगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे क्षेत्र में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। यह पहल न केवल मिथिला की गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि बिहार के ऐतिहासिक वैभव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगी।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 27, 2026, 19:57 IST
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