ईरान का जेन-जी आंदोलन: अमेरिका का दखल और इस्राइल का समर्थनवादी रुख, कैसे तय कर रहा खामेनेई की सत्ता से विदाई?

ईरान में जेन जी के नेतृत्व में उभरा जन आंदोलन अब घरेलू असंतोष तक सीमित नहीं रहा। आंदोलनकारियों को मिला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन और इस्राइल के कथित समर्थनवादी रुख ने इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। प्रदर्शनों के पीछे जहां एक ओर महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक पाबंदियां जैसे गहरे आंतरिक कारण हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी शक्तियों की प्रतिक्रियाएं इसे एक जटिल भू-राजनीतिक संदर्भ में स्थापित कर रहे हैं। पश्चिम एशियाई व ईरान पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आंदोलन मूलतः स्वदेशी है, लेकिन अब उस पर बाहरी समर्थन साफ दिख रहा है। युवाओं के साथ सभी उम्र के लोग इसमें कूद पड़े हैं। इससे ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की सत्ता से विदाई तय मानी जा रही है। बेहतर वर्तमान की ओर देख रही मौजूदा पीढ़ी ईरान की जेन जी वह पीढ़ी है जिसने 1979 की इस्लामिक रिवोल्यूशन को केवल पाठ्य पुस्तकों और सरकारी आख्यानों में देखा है। इस पीढ़ी की प्राथमिकताएं वैचारिक नारे नहीं, बल्कि वर्तमान को बेहतर करना चाहती है। इसमें रोजमर्रा की जिंदगी, आर्थिक सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वैश्विक संपर्क शामिल हैं। ये भी पढ़ें:-Venezuela: आजादी का वक्त आ गया, मादुरो की गिरफ्तारी पर बोलीं मचाडो; वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन का दावा कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के हालिया विश्लेषण बताते हैं कि यही पीढ़ी ईरान की कुल आबादी का सबसे बड़ा युवा हिस्सा है और यही आज सड़कों पर सबसे अधिक दिखाई दे रही है। आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक से जुड़े अर्थशास्त्रियों के अनुसार महंगाई 40 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है जबकि युवाओं में बेरोजगारी 25 प्रतिशत से अधिक है। हिंसा में अब तक 10 की मौत ईरान में खराब अर्थव्यवस्था के विरोध में भड़के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में दो अन्य लोगों की मौत हो गई है। इसके साथ ही विरोध-प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या 10 तक पहुंच गई है, जबकि कई लोगों के घायल होने की खबरें हैं। फिलहाल प्रदर्शन रुकने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। नई मौतें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुक्रवार को ईरान को दी चेतावनी के बाद सामने आए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की हत्या पर अमेरिका को उनकी मदद देने का कहा था। ये भी पढ़ें:-Maduro Captured: 'मेरे दोस्त को छोड़ो, वरना', मादुरो की गिरफ्तारी पर किम जोंग ने ट्रंप को दी कड़ी चेतावनी इस्राइली एजेंसियों की बड़ी भूमिका: विशेषज्ञ लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि इस्राइल ईरान के अंदर अस्थिरता को बढ़ावा देता है। हालिया आंदोलनों के संदर्भ में भी सरकारी मीडिया ने सोशल मीडिया अभियानों और साइबर गतिविधियों में इस्राइली एजेंसियों की भूमिका का दावा किया है। हालांकि, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) और कार्नेगी एंडोमेंट के विशेषज्ञ मानते हैं कि इस्राइल की भूमिका प्रत्यक्ष संगठनात्मक नहीं, बल्कि सूचना युद्ध और मनोवैज्ञानिक दबाव तक सीमित हो सकती है। उनका कहना है कि इस्राइल ईरान के आंतरिक असंतोष को रणनीतिक अवसर के रूप में देखता है, लेकिन आंदोलन की जड़ें पूरी तरह घरेलू हैं। अन्य वीडियो

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 04, 2026, 07:25 IST
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