Delhi: यमुना डूब क्षेत्र में फिर पनपने लगे अवैध डेयरी फार्म और मवेशियों के ठिकाने, तुरंत कार्रवाई के निर्देश

यमुना नदी के डूब क्षेत्र (फ्लडप्लेन) में हटाए गए अवैध डेयरी फार्म और मवेशियों के ठिकाने फिर से बन रहे हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ओर से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट से यह बात सामने आई है। पर्यावरण कार्यकर्ता गौरी मौलेखी की याचिका पर सुनवाई के दौरान डीपीसीसी ने अदालत को बताया कि मयूर विहार फेज-1 और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के पास यमुना खादर में कई स्थानों पर दोबारा़ कब्जे हो गए हैं। डीपीसीसी के वरिष्ठ पर्यावरण इंजीनियर सुनील कुमार गोयल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अधिकारियों की टीम ने जून और जुलाई 2026 में प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान यमुना के संवेदनशील ओ-जोन में डेयरी फार्मों के कोई पक्के मकान या दीवारें नहीं मिलीं, लेकिन मयूर विहार में डीएनडी फ्लाईओवर और नमो भारत आरआरटीएस कॉरिडोर के नीचे कई झुग्गियां और घास-फूस से बने अस्थायी तबेले पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, इन स्थानों पर मवेशियों को लकड़ी के खूंटों से बांधा गया था और वहां चारे और गोबर के ढेर मिले। इसके अलावा यमुना के खुले मैदानों में 50 से 60 गाय और भैंस चरती हुई मिलीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि ये पशु चक चिल्ला गांव के पशुपालकों के हैं। टीम ने कुछ भैंसों को यमुना नदी और हिंडन कट नहर में नहाते हुए भी देखा। इसी तरह न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र में भी तीन में से दो स्थानों पर मवेशियों के अस्थायी ठिकाने दोबारा बने हुए मिले। डीडीए और एमसीडी को तुरंत कार्रवाई के निर्देश यमुना का डूब क्षेत्र डीडीए के अधिकार क्षेत्र में आता है। डीपीसीसी ने 2 और 6 जुलाई 2026 को डीडीए के भूमि प्रबंधन विभाग को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। डीपीसीसी ने कहा है कि डीडीए, नगर निगम (एमसीडी) के पशु चिकित्सा विभाग की मदद से अवैध रूप से रखे गए मवेशियों को जब्त करे, अस्थायी झुग्गियों को हटाए और कार्रवाई रिपोर्ट जल्द ट्रिब्यूनल में प्रस्तुत करे। डेयरी संचालकों को 15 दिन में लाइसेंस लेने की चेतावनी प्रदूषण रोकने के लिए डीपीसीसी ने दिल्ली के सभी डेयरी और गौशाला संचालकों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 14 तक पशु रखने वाले डेयरी फार्मों को ग्रीन श्रेणी और 15 या उससे अधिक पशु रखने वाले डेयरी फार्मों को ऑरेंज श्रेणी में रखा गया है। सभी डेयरी संचालकों को 15 दिनों के भीतर प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत सहमति (कंसेंट) के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया गया है। नियमों का पालन नहीं करने पर डेयरी को सील करने के साथ बिजली और पानी की आपूर्ति भी बंद की जा सकती है। डूब क्षेत्र की सीमांकन का 75 प्रतिशत काम पूरा डूब क्षेत्र (फ्लडप्लेन) को बाढ़ और कब्जों से सुरक्षित बनाने के लिए डीडीए और दिल्ली सरकार ने 22 किलोमीटर लंबे यमुना डूब क्षेत्र की सीमांकन का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल ताजा प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, 100 साल में आने वाली संभावित बाढ़ के स्तर को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र में कुल 277 पिलर लगाए जाने हैं। इनमें से अब तक 206 पिलर लगाए जा चुके हैं। डीडीए ने अदालत को बताया है कि बाकी पिलर 31 जुलाई तक लग जाएंगे। बाढ़ सुरक्षा दीवार को मजबूत करने की मंजूरी दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को एनजीटी से राहत मिली है। एनजीटी ने मजनू का टीला (मैगजीन ड्रेन) से ओल्ड रेलवे ब्रिज (नीली छतरी मंदिर क्षेत्र) तक बनी पुरानी बाढ़ सुरक्षा दीवार की मरम्मत और उसे मजबूत करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 4.7 किलोमीटर लंबी इस दीवार को केवल दिल्ली को बाढ़ से बचाने के लिए मजबूत किया जाएगा। इसे यमुना के प्राकृतिक डूब क्षेत्र की नई सीमा नहीं माना जाएगा और इससे सीमांकन के चल रहे कार्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 2023 की बाढ़ के बाद शुरू हुई कार्रवाई पूरा मामला साल 2023 में दिल्ली में आई भीषण बाढ़ के बाद सामने आया था। बाढ़ के दौरान यमुना के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण और कब्जों के कारण पानी के प्राकृतिक बहाव में बाधा आई थी। इसके बाद एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की। एनजीटी के निर्देश पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई, जो लगातार यमुना डूब क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त और सुरक्षित बनाने के काम की निगरानी कर रही है। यमुना में डूबने से बचाएगा स्मार्ट लाइफ बॉय यमुना में लोगों को डूबने से बचाने का काम इस बार स्मार्ट लाइफ बॉय करेगा। जिला मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में इसका परीक्षण किया गया। मानसून की दस्तक के साथ ही यमुना के जलस्तर में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है, जिसे देखते हुए उत्तर-पूर्वी जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। इस बार राहत और बचाव कार्यों को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। जिला मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में स्मार्ट लाइफ बॉय का सफल परीक्षण किया गया। यह एक रिमोट कंट्रोल आधारित उपकरण है जो पानी में डूब रहे व्यक्ति तक कुछ ही सेकंड में पहुंचकर उसे सहारा दे सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें हाई-कैपेसिटी फ्लैश लाइटें लगी हैं, जिससे अंधेरे में भी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सकेगा। इस तकनीक से अब बचाव दल को तेज बहाव में खुद उतरने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 15, 2026, 02:07 IST
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