हिमाचल: रणसिंघा, काष्ठ कला और हस्तनिर्मित गलीचा को मिला जीआई टैग, कारीगरों को भी मिलेगा नया बाजार

हिमाचल प्रदेश के तीन पारंपरिक उत्पादों को जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग मिला है। इनमें रणसिंघा, वुड कार्विंग क्राफ्ट (काष्ठ कला) और हस्तनिर्मित गलीचा शामिल हैं। इस उपलब्धि से न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षण मिलेगा, बल्कि इन उत्पादों से जुड़े हजारों कारीगरों और शिल्पकारों के लिए आर्थिक अवसरों के नए द्वार भी खुलेंगे। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय की पहल से यह पंजीकरण संभव हो सका है। इस प्रक्रिया में स्थानीय उत्पादक समूहों और कारीगर संगठनों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान को कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा और इनके नाम और स्वरूप की नकल या दुरुपयोग पर रोक लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद इन उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अलग पहचान मिलेगी, जिससे उनकी मांग और बाजार मूल्य में वृद्धि होगी। इससे स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ाने और पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहन देने में मदद मिलेगी।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 15, 2026, 23:03 IST
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