Himachal: हाईकोर्ट ने कहा- वन भूमि पर बसे लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया बलपूर्वक हटाना गलत
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि वन भूमि पर बसे लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए बलपूर्वक हटाना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग या भूमि मालिक को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण कब्जे में रहने वाला व्यक्ति अपने ढांचे को तोड़े जाने से बचाने के लिए उचित बल का प्रयोग कर सकता है। इसलिए अपनी संपत्ति की रक्षा के लिए किया गया प्रतिरोध गैर-कानूनी जनसमूह की श्रेणी में नहीं माना जा सकता। अदालत ने पाया कि वन अधिकारियों के पास कथित अवैध निर्माण हटाने के लिए सक्षम प्राधिकारी (कलेक्टर) का कोई वैध और लिखित आदेश नहीं था। साथ ही शिकायतकर्ता वन रक्षक ने एफआईआर में धक्का-मुक्की का कोई उल्लेख नहीं किया था, जबकि बाद में अदालत में गवाही के दौरान यह बात जोड़ी गई। कोर्ट ने इसे बाद में किया गया सुधार माना। हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय के फैसले को तर्कसंगत और कानूनसम्मत बताते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। यह मामला शिमला जिले के ननखड़ी क्षेत्र में वन भूमि पर बने कथित अवैध ढांचों और दुकानों को हटाने की कार्रवाई से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार वन विभाग के अधिकारी कार्रवाई के लिए पहुंचे थे, जहां गुलत राम, देव राज और अन्य लोगों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, धक्का-मुक्की करने और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वर्ष 2006 में आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन बाद में सत्र न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार हाईकोर्ट पहुंची थी।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 19, 2026, 18:22 IST
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