Lucknow News: युवाओं में दिख रही गुमनाम इतिहास पढ़ने की ललक
लखनऊ। बलरामपुर गार्डन में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में युवाओं की पसंद में बदलाव नजर आ रहा है। अमूमन प्रेम कहानियों कि किताबें पसंद करने वाले युवा अब इतिहास की अनकही और कम चर्चित घटनाओं को जानने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मेले में ऐसी पुस्तकों की मांग बढ़ी है, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम और देश के गुमनाम नायकों की कहानियां दर्ज हैं।वरिष्ठ साहित्यकार हरिराम मीणा की पुस्तक धूणी तपे तीर युवाओं को खास तौर पर पसंद आ रही है। पुस्तक में 17 नवंबर 1913 को राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के मानगढ़ में ब्रिटिश सेना द्वारा किए गए नरसंहार का विस्तार से वर्णन है। मानगढ़ की इस घटना को आदिवासी जलियांवाला कांड भी कहा जाता है। इसी तरह भगवंत अनमोल की बावनी इमली भी खूब खरीदी जा रही है। इसमें 28 अप्रैल 1858 को फतेहपुर जिले की बिंदकी तहसील के बावनी में इमली के पेड़ पर 52 स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दिए जाने की घटना की कहानी दर्ज है।इन किताबों की भी मांगइतिहास के विद्यार्थियों में बिपिन चंद्र की भारत का स्वतंत्रता संग्राम और आजादी के बाद का भारत की मांग है। भगवान सिंह की भारतीय सभ्यता की निर्मिति और भारत और भारतीय मानसिकता का पहला संस्करण भी खूब बिक रहा है। पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह की संघर्ष की 80 से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। पूर्व डीजीपी ब्रजलाल की मेरा जीवन संघर्ष और डेढ़ बिसुआ जमीन, जबकि हेमंत शर्मा के संपादन में प्रकाशित अस्सी के राय साहब को भी पाठकों का अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। पुस्तक मेला मे किताबें देखते लोग पुस्तक मेला मे किताबें देखते लोग पुस्तक मेला मे किताबें देखते लोग पुस्तक मेला मे किताबें देखते लोग पुस्तक मेला मे किताबें देखते लोग पुस्तक मेला मे किताबें देखते लोग
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 06, 2026, 03:04 IST
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