लड़ाकू विमान: हिंद-प्रशांत में सैन्य सहयोग मजबूत करने की कवायद, जापान के साथ राफेल एफ4 ने किया हवाई अभ्यास

फ्रांस ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने के लिए करीब 40 हजार किलोमीटर लंबे वैश्विक हवाई मिशन पर राफेल एफ4 लड़ाकू विमानों को उतारा है। फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल का पेगास 26 मिशन 8 सितंबर को फ्रांस से रवाना हुआ और ग्रीनलैंड, कनाडा तथा अलास्का के रास्ते जापान पहुंचा। जापान के बाद यह दल इंडोनेशिया और भारत गया। करीब 40 दिन के इस मिशन के मध्य अक्टूबर में फ्रांस लौटने की योजना है। यह जानकारी द योमिउरी शिंबुन के अंग्रेजी संस्करण द जापान न्यूज ने अपनी विशेष रिपोर्ट में दी है। 2023 से शुरू हुई थीराफेल एफ4 लड़ाकू विमान की तैनाती रिपोर्ट में मिशन के दौरान राफेल एफ4 लड़ाकू विमानों और फ्रांसीसी सैन्य परिवहन विमानों की गतिविधियों तथा जापान के साथ हुए हवाई अभ्यास का प्रत्यक्ष विवरण दिया गया है। फ्रांसीसी दल में नौ विमान और करीब 300 सैन्यकर्मी शामिल हैं। इसके केंद्र में राफेल एफ4 लड़ाकू विमान हैं, जिनकी तैनाती 2023 से शुरू हुई थी। इस संस्करण में नेटवर्क आधारित संचार क्षमता को काफी मजबूत किया गया है और यह लंबी दूरी की आधुनिक मिसाइलों से लैस हो सकता है। फ्रांस राफेल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल और ड्रोन के साथ समन्वित अभियान की क्षमता पर भी परीक्षण कर रहा है।राफेल के साथ ए400एम और ए330 एमआरटीटी परिवहन एवं ईंधन भरने वाले विमान भी मिशन में शामिल हैं। ए330 एमआरटीटी हवा में ही राफेल को ईंधन उपलब्ध करा सकता है। इससे कम दूरी वाले लड़ाकू विमान भी लंबी दूरी के अभियानों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जापान में हुआ हवाई युद्धाभ्यास फ्रांसीसी हवाई दल जापान के हयाकुरी एयरबेस पहुंचा और करीब एक सप्ताह वहां रहा। जापान की वायु आत्मरक्षा बल के साथ नौवहन प्रशिक्षण, फॉर्मेशन फ्लाइंग, हवा में ईंधन भरने और लड़ाकू अभ्यास किए गए। दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने डॉगफाइट यानी काल्पनिक हवाई युद्ध का भी अभ्यास किया।कांतो क्षेत्र में टोक्यो के हानेदा और नारिता जैसे व्यस्त हवाई अड्डे होने के कारण अभ्यास के दौरान सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों के पायलटों ने लड़ाकू विमानों के सेंसर से एक-दूसरे की स्थिति पर नजर रखी और रेडियो के जरिए उड़ान मार्ग तथा ऊंचाई की लगातार पुष्टि की। चीन के बीच बढ़ता हिंद-प्रशांत सहयोग फ्रांस के वायु एवं अंतरिक्ष बल प्रमुख जनरल जेरोम बेलांजे ने कहा कि इस तरह की एरियल डिप्लोमेसी क्षेत्रीय सहयोग का व्यापक नेटवर्क मजबूत करती है। उनके मुताबिक जितना अधिक सहयोग होगा, रणनीतिक प्रतिस्पर्धियों के लिए अस्थिर करने वाली गतिविधियां करना उतना ही कठिन होगा।उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत में किसी मानवीय या सुरक्षा संकट की स्थिति में जापान की मदद के लिए तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए क्षेत्र की बेहतर समझ और दोनों देशों की सेनाओं के बीच संचालन क्षमता बढ़ाना जरूरी है। भारत के लिए क्यों अहम फ्रांस के इस मिशन का भारत तक पहुंचना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत और फ्रांस पहले से रक्षा क्षेत्र में करीबी साझेदार हैं और भारत के पास फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान हैं। हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता के बीच फ्रांस की इस तरह की लंबी दूरी की तैनाती भारत, जापान और अन्य साझेदार देशों के साथ उसकी बढ़ती रणनीतिक भागीदारी को भी रेखांकित करती है।

#IndiaNews #National #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 05, 2026, 02:35 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »

Read More:
India news National



लड़ाकू विमान: हिंद-प्रशांत में सैन्य सहयोग मजबूत करने की कवायद, जापान के साथ राफेल एफ4 ने किया हवाई अभ्यास #IndiaNews #National #VaranasiLiveNews