57,000 करोड़ रुपए क्रिप्टो चोरी मामला: एफबीआई की जांच में बड़ा दावा, क्या उत्तर कोरियाई हैकरों ने दिया अंजाम?
दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस से कुछ ही मिनटों में अरबों डॉलर की डिजिटल करेंसी चोरी होने के मामले में अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने बड़ा खुलासा किया है। एफबीआई के मुताबिक, इस ऐतिहासिक साइबर चोरी के पीछे उत्तर कोरिया के हैकरों का हाथ है। एजेंसी ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि इस सप्ताह हुआ हमला ट्रेडरट्रेटर नाम के एक समूह की दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों से जुड़ा है। यही समूह पिछले साल बायबिट से 1.5 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी चोरी करने के मामले में भी शामिल था।एफबीआई ने क्रिप्टो एक्सचेंजों, ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनियों और अन्य संबंधित संस्थाओं से अपील की है कि वे चोरी की गई रकम से जुड़े विभिन्न डिजिटल वॉलेट पतों के लेनदेन को रोकें। इसका मकसद चोरी की रकम को दूसरी जगह भेजकर उसके मूल स्रोत को छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग करने से रोकना है। ये भी पढ़ें:ईरान पर नए सैन्य हमले की तैयारी: डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर की बात, संभावित कार्रवाई की चर्चा जांच एजेंसी के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि ट्रेडरट्रेटर चोरी की गई डिजिटल संपत्तियों को मुख्य रूप से एथेरियम क्रिप्टोकरेंसी में बदल रहा है। एफबीआई को आशंका है कि हैकर अब विकेंद्रीकृत वित्तीय प्लेटफॉर्म और इंस्टेंट स्वैप सेवाओं के जरिए इन संपत्तियों को दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में बदलने की कोशिश कर सकते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में उत्तर कोरिया की भूमिका को लेकर अनिश्चितता जताई है। शनिवार रात फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो एस्टेट में हैलोवीन पार्टी के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि वह इस मामले को लेकर चिंतित नहीं हैं और जांच जारी है। उन्होंने कहा, 'हम इसके बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। हमें नहीं पता कि इसमें उत्तर कोरिया शामिल है या नहीं।' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जांच के बाद इस बात की पुष्टि हो सकती है। चोरी की रकम ठिकाने कैसे लगाएंगे हैकर क्रिप्टो विशेषज्ञ एरी रेडबोर्ड का अनुमान है कि हैकर चोरी की गई डिजिटल संपत्तियों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर छोटे एक्सचेंजों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करने की कोशिश करेंगे, ताकि उनकी पहचान न हो सके। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया कई महीनों तक चल सकती है। ब्लॉकचेन इंटेलिजेंस कंपनी टीआरएम लैब्स के मुख्य नीति अधिकारी रेडबोर्ड ने कहा कि यह इंटरनेट की रफ्तार से की गई बैंक डकैती जैसा है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए चोरी की गई रकम को वास्तविक समय में ट्रैक किया जा सकता है। इससे जांच एजेंसियों को लेनदेन रोकने और चोरी की संपत्ति जब्त कर वापस पाने में मदद मिल सकती है। 6 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी हुई थी चोरी बाइनेंस से गुरुवार को बिटकॉइन और दूसरी डिजिटल मुद्राओं के रूप में लगभग 6 अरब डॉलर (भारतीय करेंसी में करीब 57,000 करोड़ रुपये) की संपत्ति चोरी हुई थी। बाइनेंस दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज है। कई क्रिप्टो विशेषज्ञों ने इस हमले के तरीके को उत्तर कोरियाई हैकरों की गतिविधियों से मिलता-जुलता बताया था। ये भी पढ़ें:दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो डाका: हैकर्स ने उड़ाए 6 अरब डॉलर के क्रिप्टोकरेंसी, शक के घेरे में उत्तर कोरिया कंपनी ने शनिवार को कहा कि उसके पास चोरी हुई डिजिटल करेंसी के समान ही पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे गायब हुई संपत्ति के करीब 90 प्रतिशत हिस्से की भरपाई की जा सकती है। बाइनेंस ने ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें उनकी पूरी रकम वापस की जाएगी।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 01, 2026, 08:44 IST
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