फादर्स डे : कैमरे के पीछे का संघर्ष, अखाड़े में बेटी की चमक
सोनीपत। फादर्स डे पर यदि पिता के संघर्ष और बेटी की सफलता की कोई प्रेरक कहानी तलाशनी हो तो जुआं गांव की पहलवान निकिता छिक्कारा इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। साधारण परिवार से आने वाली निकिता अंडर-17 एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में वियतनाम में रजत पदक जीत चुकी हैं। निकिता की इस उपलब्धि के पीछे उनके पिता मंजीत उर्फ मनु का वर्षों का संघर्ष और समर्पण छिपा है। पेशे से फोटोग्राफर मनु ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी बेटी के सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। तीन बेटियों व एक बेटे की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने निकिता को अखाड़े तक पहुंचाने, प्रशिक्षण दिलाने और प्रतियोगिताओं में भेजने के लिए हर संभव प्रयास किया। कई बार आर्थिक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन पिता ने हिम्मत नहीं हारी और बेटी का मनोबल हमेशा ऊंचा रखा। गांव बड़वासनी स्थित कुलदीप मलिक कुश्ती अकादमी में प्रशिक्षण लेने वाली निकिता ने अपनी मेहनत से अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। एशियन चैंपियनशिप में रजत के साथ वह महाराष्ट्र में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अंडर-17 वर्ग का स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। पिता मंजीत के लिए यह उपलब्धियां किसी पुरस्कार से कम नहीं हैं। कैमरे के पीछे वर्षों तक संघर्ष करने वाले पिता की मेहनत आज बेटी की सफलता के रूप में चमक रही है। वह मानते हैं कि जब किसी पिता का विश्वास और बेटी का संकल्प साथ हो तो सपनों की उड़ान सीमाओं से कहीं आगे निकल जाती है।
#Father'sDay:TheStruggleBehindTheCamera #TheDaughter'sShineInTheArena. #VaranasiLiveNews
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 19, 2026, 20:39 IST
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