Lucknow News: किसान के बेटे ने मनवाया मेधा का लोहा

लखनऊ। भाषा विवि के दीक्षांत समारोह में मंच से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जब यह पूछा कि यहां बैठे मेधावियों में कितने गरीब परिवारों से हैं तो तिवारी अमन विकास कुमार के सिवाय किसी ने हाथ नहीं उठाया। इस मेधावी ने बीएड में 88 प्रतिशत अंकों के साथ सर्वोच्च स्थान पाकर दो गोल्ड मेडल प्राप्त किए। फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेज में भी उनके सबसे ज्यादा अंक हैं। अमर उजाला से बातचीत में अमन ने बताया कि पिता विकास कुमार साधारण किसान हैं और परिवार में सात बीघा जमीन है। सुल्तानपुर के लंबुआ के पास ईशीपुर निवासी अमन के परिवार में दादी-बाबा, छोटी बहन और मां हैं। अमन ने बताया कि आगे एमएड करके पीएचडी करनी है और प्रोफेसर बनने का सपना है। कहा, आर्थिक स्थिति कमजोर होने का असर पिता ने मेरी पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया। चांसलर मेडल मिलना मेरा सौभाग्य कानपुर के हंसपुरम में रहती हूं। पिता राजकुमार मिश्रा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और माता दिशा मिश्रा एएनएम हैं। मैंने 92.3 प्रतिशत अंकों के साथ बीटेक बायोटेक्नोलॉजी उत्तीर्ण किया है। इस समय गुड़गांव की फार्मा कंपनी में क्लीनिकल रिसर्च कोऑर्डिनेटर हूं। इसी क्षेत्र में प्रोजेक्ट मैनेजर बनना चाहती हूं। एमबीए करना है। चांसलर मेडल समेत दो गोल्ड मेडल मिलना सौभाग्य की बात है।- सौम्या मिश्रा, चांसलर मेडल समेत तीन गोल्डफूड टेक्नोलॉजी में करना है काम इटौंजा में रहती हूं। मैंने 89 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी बायो टेक्नोलॉजी किया है। सफलता का श्रेय मम्मी-पापा को दूंगी। अब एमएससी बायोटेक्नोलॉजी करना है। पापा ज्ञानेंद्र यादव का हार्डवेयर का व्यवसाय है और मां संगीता गृहिणी हैं। फूड टेक्नोलॉजी में कॅरिअर बनाना है। आगे एमएससी के बाद पीएचडी करूंगी। - आकाशी यादव, वाइस चांसलर मेडल समेत तीन गोल्ड इस्लामिक शिक्षा में बनाना है कॅरिअर बहराइच जिले का रहने वाला हूं। प्रारंभिक शिक्षा मदरसे में ही हुई। पिता भी बहराइच के मदरसे में शिक्षक हैं। भाषा विवि के प्रतिष्ठित ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती मेडल के लिए चयन होना मेरा सौभाग्य है। अमीनाबाद में रहकर पार्टटाइम जॉब के साथ पढ़ाई कर रहा हूं। ऑनलाइन कक्षाओं से इस्लामिक शिक्षा को लोगों तक पहुंचा रहा हूं। इस्लामिक शिक्षा में कॅरिअर बनाना चाहता हूं।- मुफ्ती मो. अफ्फान, ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती मेडल समेत तीन गोल्डकुछ अलग करने की थी चाहत त्रिवेणीनगर का रहने वाला हूं। शिक्षा के क्षेत्र में बाकी छात्रों से अलग दिखने की चाह थी। एलएलबी में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर मिली सफलता से संतुष्ट हूं। इसके लिए शिक्षकों व परिवार का शुक्रिया अदा करता हूं। पिता बाबूलाल परिवहन निगम से असिस्टेंट मैकेनिक पद से सेवानिवृत्त हैं। मां मधु सिंह गृहिणी हैं।- शुभम सिंह, दो गोल्ड मेडलदो गोल्ड मेडल का भरोसा नहीं थासीतापुर का रहने वाला हूं। एलएलएम में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं। दो स्वर्ण पदक भी मिलेंगे, इसके बारे में कभी नहीं सोचा था। मेरी सफलता के पीछे पिता मणिकांत त्रिपाठी और मां नीता त्रिपाठी का बड़ा योगदान है। - अमन कुमार त्रिपाठी, दो गोल्ड मेडल

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 09, 2026, 02:32 IST
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