हाईकोर्ट : एंबुलेंस बुलाने का सबूत नहीं दे पाना हत्या साबित करने का आधार नहीं, कोर्ट ने पति को किया बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एंबुलेंस बुलाने का सबूत नहीं दे पाना हादसे को हत्या साबित करने का आधार नहीं माना जा सकता। हत्या का आरोप सिद्ध करना अभियोजन की जिम्मेदारी है। बेगुनाही के सबूत का भार आरोपी पर नहीं थोपा जा सकता। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने पत्नी की हत्या में उम्रकैद पाए अनिल कुमार सागर की अपील स्वीकार कर ली। कोर्ट ने फर्रुखाबाद के ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए याची को बरी कर दिया। अभियोजन के अनुसार आठ सितंबर 2013 को आरोपी अपनी पत्नी के साथ बाइक से जा रहा था। आरोप है कि नवाबगंज-वीरपुर मार्ग पर नगला झब्बू सिंह गांव के पास पत्नी की हत्या कर शव सड़क पर फेंक दिया। इसके बाद दावा किया कि वह शौच के लिए रुका था, तभी एक मिनी ट्रक ने उसकी पत्नी को टक्कर मार दी। उसने तत्काल परिजनों को सूचना दी। एंबुलेंस बुलाकर पत्नी को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। विवाहिता के मायकेवालों ने हत्या और सबूत मिटाने का मुकदमा दर्ज कराया। फर्रुखाबाद की विशेष न्यायाधीश की अदालत ने 30 मार्च 2024 को दोषसिद्धि का फैसला सुनाया था। तीन अप्रैल 2024 को सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने पाया कि मृतका के पिता और भाई घटना के प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे। उनके बयान हत्या के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। मृतका के पिता की ओर से पुलिस अधीक्षक को दिया गया शिकायती पत्र घटना के बाद का था। उसकी मूल प्रति भी पेश नहीं की गई थी। मृतका के पोस्टमार्टम में शरीर पर 12 बाहरी चोटें मिली थीं। डॉक्टर ने माना कि ये चोटें वाहन दुर्घटना से भी आ सकती थीं।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 29, 2026, 13:32 IST
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