Kurukshetra News: कर्मचारियों ने दी चेतावनी, मांगों पर गौर नहीं किया तो होगा आंदोलन
कुरुक्षेत्र। विभिन्न विभाग, बोर्ड, निगम, नगर-निगम और विश्वविद्यालयों में कार्यरत कर्मियों ने अपनी मांगों को एक बार फिर दोहराया है। साझे संगठन हरियाणा मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन (सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ) के अंतर्गत कर्मचारियों ने एकसुर में कहा कि भाजपा के 2014 चुनावी घोषणा पत्र में जिक्र था कि 25 अगस्त 2014 के मंत्रीमंडल के निर्णय अनुसार 7वें वेतन आयोग में लिपिक 35400, एसडीसी 39900, सहायक, आंकड़ा सहायक, एडब्ल्यूबीएन, स्टेनोग्राफर 44900, उपाधीक्षक 47600, अधीक्षक 56100 का हक बनता है। इसे लगातार 12 वर्ष से वंचित किया गया है, जबकि विधायक मंत्रियों के वेतन भत्तों में भारी भरकम बढ़ोतरी की गई है। 1957 में हुए 15वें श्रम सम्मेलन के बाद डाॅ अक्रोयड़ द्वारा सुझाए फार्मूले 2700 केलोरी खुराक के आधार पर माता पिता, पति-पत्नी 2 बच्चे यानी पांच इकाई मानकर वेतन देने का सुझाव दिया गया था। राज्य में इस समय न्यूनतम 16900और अधिकतम 182200 रुपये इनका अनुपात 1:14 है। श्रम आयोग का मानना है कि न्यूनतम और अधिकतम वेतन का अनुपात 1:7 होना चाहिए। ग्रुप डी का शुरुआती वेतन 26 हजार बनता है। इस अनुसार लिपिक का वेतन जनवरी 2016 से 35400 बनता है। प्रदेशाध्यक्ष हितेंद्र सिहाग, महासचिव जगमिंदर सिंह और प्रवक्ता संदीप सांगवान ने कहा कि सरकार की रीढ़ कहलाने वाले इन कर्मियों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। रेशनेलाइजेशन के नाम पर पदों को समाप्त किया जा रहा है। कर्मियों की पुरानी पेंशन को शेयर बाजार के हवाले कर दिया। चार लेबर कोड थोपकर ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमला जारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते मांगों का समाधान नहीं किया तो सरकार को बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। संवाद
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 02, 2026, 03:33 IST
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