डीयू आदेश को तुरंत ले वापस : डीटीएफ

यूजीसी विनियम 2026 के पक्ष में चल रहे लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने की कोशिश अमर उजाला ब्यूरोनई दिल्ली।डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) ने डीयू प्रॉक्टर कार्यालय के आदेश प्रदर्शन न करने की अनुमति की निंदा की है। डीटीएफ ने इसे शांति बनाए रखने के नाम पर लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को कुचलने वाला, दमनकारी और असंवैधानिक कदम बताया है। इस आदेश की आड़ में यूजीसी इक्विटी संबंधी प्रदर्शनों के आंदोलन को दबा नहीं सकता है। साथ ही आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है। डीटीएफ के अध्यक्ष राजीब रे और सचिव आभा देव हबीब के अनुसार यह आदेश यूजीसी विनियम 2026 के पक्ष में चल रहे लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से लाया गया है। यह निर्देश भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और 19(1)(बी) में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का खुला उल्लंघन है। प्रशासन द्वारा दिसंबर 2025 के एक पुलिस आदेश का हवाला देना भ्रामक और छलपूर्ण है। यह आदेश विश्वविद्यालय परिसर को लोकतांत्रिक संघर्ष का मंच बनने से रोकने के लिए लाया है। इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग करते है। साथ ही देशभर के लोकतांत्रिक संगठनों से डीयू छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ एकजुटता दिखाने की अपील है। संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा और इसे किसी भी तरह रोका नहीं जा सकता।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 17, 2026, 19:40 IST
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