नवरात्रि उत्सव: नारी सशक्तीकरण का मतलब पुरुषों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना नहीं, समान अवसर और अधिकार मिलना है
नारी सशक्तीकरण का मतलब पुरुषों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं और पुरुषों को समान अवसर, अधिकार और भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके लिए जरूरी है कि महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनें और परिवार से लेकर कार्यक्षेत्र तक निर्णय लेने में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएं। बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में नवरात्र पर हुए विशेष संवाद में शहर के विभिन्न क्षेत्राें की महिलाओं ने इन मुद्दों पर खुलकर बात की। नवरात्र : नारी शक्ति के विचार, अधिकार, सशक्तीकरण और शिक्षा विषयक पर हुए संवाद में सीए, डॉक्टर, टीचर और पुलिस ऑफिसर ने नारी शक्ति के विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि सशक्त समाज की नींव मजबूत परिवार और बेहतर परवरिश से पड़ती है। घर में मातृशक्ति मजबूत होगी तो बेटियों में आगे बढ़ने का खुद आत्मविश्वास पैदा होगा। इससे न केवल परिवार, बल्कि समाज और देश के निर्माण में भी वे बराबरी का योगदान दे सकेंगी।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 15, 2026, 10:29 IST
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