Delhi: राजधानी में धूल पर अब डिजिटल पहरा, निर्माण स्थल पर धूल उड़ते ही होगी कार्रवाई, डस्ट पोर्टल 2.0 लॉन्च

दिल्ली में अब से हर एक निर्माण स्थल पर उड़ने वाली धूल का हिसाब एआई कैमरे लेंगे। सरकार ने सोमवार को एआई संचालित डस्ट पोर्टल 2.0 लॉन्च किया है, जिसने 500 वर्ग गज या उससे बड़े सभी निर्माण स्थलों की डिजिटल निगरानी शुरू कर दी है। 360 डिग्री कैमरों, सेंसर और रियल टाइम डाटा से लैस ये सिस्टम नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित एजेंसियों को अलर्ट करेगा और तत्काल कार्रवाई हो जाएगी। सचिवालय में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ओर से विकसित यह अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसके लिए डीपीसीसी की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अब तक निर्माण स्थलों की निगरानी मुख्य रूप से मैनुअल तरीके से होती थी। नई व्यवस्था में एआई, जीआईएस मैपिंग, 360 डिग्री कैमरे और पीएम-10 व पीएम-2.5 सेंसर लगातार निगरानी करेंगे। इससे धूल नियंत्रण के नियमों का पालन अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित होगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। डस्ट पोर्टल 2.0 निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के पांच प्रमुख मानकों का खुद से आकलन करेगा। प्रदूषण बढ़ने पर सिस्टम येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी करेगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में एनफोर्समेंट नोटिस और अनुपालन प्रमाणपत्र भी डिजिटल तरीके से जारी किए जाएंगे। भविष्य में चालान प्रक्रिया को भी इसी प्रणाली से जोड़ने की तैयारी चल रही है। सीएम ने कहा, सड़क, मिट्टी और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल दिल्ली के वायु प्रदूषण का बड़ा स्रोत है। गर्मियों में कुल प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी और सर्दियों में 15 फीसदी तक होती है। वहीं पीएम-10 प्रदूषण में धूल की हिस्सेदारी 66 फीसदी और पीएम-2.5 में 38 फीसदी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि बार-बार नियम तोड़ने वाले निर्माण स्थलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और एआई आधारित यह प्रणाली धूल प्रदूषण नियंत्रण को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाएगी। 900 सक्रिय निर्माण स्थलों पर रहेगी नजर डीपीसीसी के मुताबिक राजधानी में करीब 1800 निर्माण स्थल पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इनमें करीब 900 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि करीब 900 सक्रिय निर्माण स्थलों को नए पोर्टल से जोड़ा गया है। अब 500 वर्ग गज या उससे बड़े सभी निर्माण स्थलों के डिजिटल रिकॉर्ड एक ही मंच पर उपलब्ध हैं। इससे सरकार के पास निर्माण गतिविधियों का केंद्रीकृत डाटाबेस है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 14, 2026, 04:13 IST
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