नववर्ष मेला : माधवास रॉक बैंड के भजनों पर झूमे श्रद्धालु

नववर्ष अभिनंदन एवं मेला आयोजन समिति द्वारा मंगलवार को आगरा रोड स्थित कैलाश फार्म हाउस में नववर्ष मेले का आयोजन हुआ। दोपहर में बच्चों ने भारतीय संस्कृति की खुशबू बिखेरी तो शाम होते ही मां भारती की आरती संग जयघोष हुआ। रात में वृंदावन से आए माधवास रॉक बैंड ने ब्रज के गीतों से सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। बैंड के कलाकार नवकिशोर और उनकी पत्नी नंदरानी ने आवाज के जादू से एक से बढ़कर एक भजन गाए। भगवामय वातावरण में पूरा माहौल भक्ति के रंग में रंग गया। उन्होंने सुनाया आली री मोहे लागे वृंदावन नीकाै, मेरे बांके बिहारी लाल तू इतना ना करियो शृंगार, मेरे झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएंगे राम आएंगे, गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो,जैसे भजनों की शानदार प्रस्तुति दी। देर रात तक दर्शक उनके साथ सुर मिलाते रहे।हवन के साथ शुरू हुआ कार्यक्रमनववर्ष मेले में सुबह हुए हवन में विभाग सह संघ चालक ललित कुमार, आचार्य प्रशांत शास्त्री, मुख्य यजमान भाजपा ब्रजक्षेत्र के उपाध्यक्ष श्योराज सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह, इंद्रकुमार गुप्ता, कमलेश गुप्ता आदि मौजूद रहे। कथावाचक सुनील कौशल, महंत योगी कौशलनाथ, विभाग संघ चालक राजकुमार, विभाग प्रचारक गोविंद, विभाग सह संघ चालक ललित, महानगर कार्यवाह रतन मित्र ने मेले का शुभारंभ किया। शाम को भारत माता पूजन व हनुमान चालीसा के बाद माधवास बैंड ने प्रस्तुति दी गई। महानगर प्रचारक राम, महानगर संघ चालक अजय सराफ, विभाग कार्यवाह योगेश आर्य, सांसद सतीश गौतम, महानगर अध्यक्ष राजीव शर्मा, डॉ. राजीव अग्रवाल, राकेश साईं, डाॅ. अंशु सक्सेना, साध्वी पुनीता चेतन आदि थे। संचालन राजनारायण सिंह व प्रतिमा पोद्दार ने किया। मिले पुरस्कार तो खिले चेहरेनृत्य में नीति, तेजस्विनी, कृष्णा, खुशी कुमारी, अनन्या व दिव्यांशी विजेता रहीं। गायन में नाट्य सिंह, स्वर्णिम, मेधा, आदविक, स्वीकृति व पूर्वी ने पुरस्कार जीता।चित्रकारी में युक्ति सिकरवार, दिविशा, निहारिका, दीपक, वंश वार्ष्णेय व संजना वर्मा विजयी रहे। कविता में आरुष चौधरी, कोमल मिश्रा, पूर्वी चौधरी, विवेक, विपिन व उर्वशी विजेता रहीं। सनातन की ओर लौट रहे युवा : नवकिशोरवृंदावन के माधवास राॅक बैंड के कलाकार नवकिशोर और उनकी पत्नी नंदरानी गोपी का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली के बीच अब युवा वर्ग सनातन संस्कृति और परंपराओं की ओर लौट रहा है। कीर्तन और धार्मिक आयोजनों में उनकी बढ़ती भागीदारी इसका प्रमाण है। युवा न केवल इन आयोजनों में शामिल हो रहे हैं, बल्कि आयोजन और संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तनावपूर्ण जीवन के बीच युवा अब मानसिक शांति और आत्मिक संतोष के लिए सनातन परंपराओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। भजन, संकीर्तन और भगवान के सिमरन के माध्यम से उन्हें एक नई ऊर्जा और सुकून मिल रहा है। इससे सनातन संस्कृति की जड़ें मजबूत हो रही हैं। नई पीढ़ी इसे अपनाकर अपनी पहचान से जुड़ने का प्रयास कर रही है। नव वर्ष मेले में आयोजित भजन संध्या में फूलों की होली खेलते लोग।- फोटो : Samvad नव वर्ष मेले में आयोजित भजन संध्या में फूलों की होली खेलते लोग।- फोटो : Samvad

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 18, 2026, 06:22 IST
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