आपराधिक केस छिपाना मामूली भूल नहीं, नियुक्ति से इनकार बिलकुल सही : हाईकोर्ट

- एलडीसी भर्ती में अभ्यर्थी की नियुक्ति की मांग वाली याचिका खारिज- बरी होने के बावजूद प्रारंभिक जानकारी छिपाने को अदालत ने माना गंभीरचंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड में लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी) पद पर चयनित अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित करने के फैसले को सही ठहराते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि आवेदन पत्र में लंबित आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाना साधारण चूक नहीं माना जा सकता भले ही बाद में संबंधित व्यक्ति बरी हो गया हो।याची ने वर्ष 2019 में जारी विज्ञापन के तहत एलडीसी पद के लिए आवेदन किया था। आवेदन पत्र में उसने लंबित एफआईआर से संबंधित काॅलम में नहीं अंकित किया जबकि उसके विरुद्ध पानीपत में वर्ष 2018 में मामला दर्ज था। चयन के बाद 18 मई 2021 को उसे नियुक्ति पत्र जारी हुआ। बाद में भरे गए चरित्र सत्यापन प्रपत्र में उसने लंबित केस का उल्लेख कर दिया। इसके बाद निगम ने उसे ज्वाइन करने की अनुमति नहीं दी। याचिकाकर्ता इससे पहले भी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुका था जिसे चार मार्च 2022 को खारिज कर दिया था। बाद में ट्रायल कोर्ट ने 20 मार्च 2024 को उसे बरी कर दिया। इसके आधार पर उसने पुन: प्रतिनिधित्व देकर नियुक्ति की मांग की लेकिन आठ जनवरी 2026 के आदेश से निगम ने दावा अस्वीकार कर दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए वर्तमान याचिका दाखिल की गई थी।अदालत ने कहा कि केवल बरी हो जाना नियुक्ति का स्वत: अधिकार नहीं देता। नियुक्ति प्रक्रिया में अभ्यर्थी की ओर से दी गई जानकारी पूर्ण और सत्य होनी चाहिए। गंभीर प्रकृति के मामलों में तथ्य छुपाने नियोक्ता को उम्मीदवार की उपयुक्तता पर पुनर्विचार का अधिकार देता है। कोर्ट ने माना कि संबंधित एफआईआर भर्ती प्रक्रिया में प्रतिरूपण जैसे आरोपों से जुड़ी थी जिसे तुच्छ या तकनीकी त्रुटि नहीं कहा जा सकता। ऐसे में निगम की ओर से उम्मीदवार को अनुपयुक्त मानना मनमाना नहीं है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 21, 2026, 19:47 IST
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