Panipat News: आयोग ने बीमा कंपनी को 7.75 लाख रुपये के भुगतान का दिया आदेश

पानीपत। टीबी की 12 साल पुरानी बीमारी का बहाना बनाकर क्लेम न देने पर आयोग ने बीमा कंपनी को फटकार लगाई है। जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि जिस बीमारी के इलाज के लिए क्लेम मांगा गया है उसका टीबी से कोई संबंध है। आयोग ने कंपनी को 7.75 लाख रुपये का छह प्रतिशत ब्याज दर के साथ भुगतान करने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति और मुकदमे में हुए खर्च के लिए जुर्माना भी लगाया है। पानीपत के ईश्वर ने 2023 में जिला उपभोक्ता आयोग में इस संबंध में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उसने वर्ष 2015 में फैमिली हेल्थ ऑप्टिमा मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी। उनकी पॉलिसी 30 जुलाई 2022 से 29 जुलाई 2023 तक प्रभावी थी। दिसंबर 2022 में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सात दिसंबर से पांच जनवरी तक दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। जिसमें उनके इलाज में करीब 12.95 लाख रुपये खर्च हुए। उस दौरान कंपनी ने कुछ पैसों का भुगतान कर दिया। बाद में कंपनी ने क्लेम यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि परिवादी ने 12 वर्ष पूर्व हुए टीबी उपचार का रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया। सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि टीबी उपचार योग्य बीमारी है और 12 वर्ष पुरानी बीमारी का वर्तमान रोग से कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं किया गया। अस्पताल की ओर से भी प्रमाणपत्र दिया गया था कि पुरानी टीबी का मौजूदा बीमारी से कोई संबंध नहीं है। आयोग ने पाया कि पॉलिसी धारक ने सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे और बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि कोई तथ्य छिपाया गया है। इसलिए क्लेम खारिज करना सेवा में कमी माना गया। आयोग ने बीमा कंपनी को 7.75 लाख की राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने के आदेश दिए। साथ ही पांच हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न और 5,500 रुपये मुकदमे खर्च के तौर पर अदा करने के निर्देश दिए हैं। ब्यूरो

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 01, 2026, 06:02 IST
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