Delhi NCR News: ध्यान से मस्तिष्क के नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ने का दावा
एम्स नई दिल्ली और आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट ने संयुक्त रूप से किया अध्ययनअमर उजाला ब्यूरोनई दिल्ली। ध्यान यानी मेडिटेशन करने से मस्तिष्क के अहम नेटवर्क अधिक प्रभावी ढंग से काम करते हैं और जानकारी को बेहतर तरीके से समझने की क्षमता बढ़ती है। यह दावा हाल ही में एम्स नई दिल्ली और आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट द्वारा संयुक्त रूप से किए गए अध्ययन में किया गया है। इसके अनुसार, नियमित रूप से ध्यान करने वाले लोगों के मस्तिष्क में स्मॉल-वर्ल्ड नेटवर्क की कार्यक्षमता बेहतर पाई गई, जो सोचने-समझने, ध्यान केंद्रित करने और निर्णय लेने जैसी क्षमताओं से जुड़ा है। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के भौतिकी और कंप्यूटर विज्ञान विभाग की गीता प्रेम चंदू दामिसेट्टी ने बताया कि बेहतर ढंग से संगठित मस्तिष्क नेटवर्क बेहतर संज्ञानात्मक प्रदर्शन से जुड़े होते हैं। यह कार्यक्षमता विशेष रूप से स्मॉल-वर्ल्ड नेटवर्क में दिखाई देती है, जो मस्तिष्क में स्थानीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान और वैश्विक स्तर पर विभिन्न हिस्सों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करता है। इससे जानकारी का बेहतर और संतुलित प्रसंस्करण संभव हो पाता है।----------मैग्नेटोएन्सेफालोग्राफी तकनीक का किया उपयोगअध्ययन में मस्तिष्क के तीन प्रमुख कार्यात्मक नेटवर्क डिफॉल्ट मोड नेटवर्क, फ्रंटो-पैरिएटल नेटवर्क और अटेंशन नेटवर्क का विश्लेषण किया गया। इसमें अनुभवी ध्यानी, शुरुआती ध्यानी और नियंत्रण समूह तीन समूहों को शामिल किया गया। शोध के दौरान मैग्नेटोएन्सेफालोग्राफी तकनीक का उपयोग किया गया। अनुभवी और शुरुआती ध्यान साधकों के 10 मिनट के सूरत-शब्द-योग ध्यान सत्र रिकॉर्ड किए गए, जबकि नियंत्रण समूह के लोगों को चार चक्र ध्यान का प्रारंभिक परिचय देकर उसका अभ्यास कराया गया। इसके बाद विभिन्न ध्यान अवस्थाओं के दौरान चार से 45 हर्ट्ज आवृत्तियों पर मस्तिष्क की कनेक्टिविटी का अध्ययन किया गया।-------ध्यान करने वाले और ध्यान न करने वालों के मस्तिष्क नेटवर्क में मिला अंतरएम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रो. मंजरी त्रिपाठी ने बताया कि अध्ययन में पाया गया है कि ध्यान करने वाले और ध्यान न करने वाले लोगों के मस्तिष्क नेटवर्क में स्पष्ट अंतर पाए गए हैं। अनुभवी ध्यान साधकों में अटेंशन नेटवर्क के भीतर बीटा फ्रीक्वेंसी रेंज (19 हर्ट्ज) पर स्मॉल-वर्ल्ड प्रोपेंसिटी अधिक देखी गई। वहीं, शुरुआती ध्यान साधकों में फ्रंटो-पैरिएटल नेटवर्क के भीतर थीटा फ्रीक्वेंसी रेंज (8 हर्ट्ज) पर स्मॉल-वर्ल्ड प्रोपेंसिटी में वृद्धि दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये परिणाम दर्शाते हैं कि ध्यान मस्तिष्क के विभिन्न नेटवर्कों को उनकी कार्यात्मक जरूरतों के अनुसार सक्रिय करता है। इससे मस्तिष्क की सूचना प्रसंस्करण क्षमता बेहतर होती है और ध्यान, एकाग्रता, आत्म-नियंत्रण और अन्य संज्ञानात्मक कार्यों में सुधार आता है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 20, 2026, 19:36 IST
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