ताकि सोशल मीडिया पर बच्चे सुरक्षित हों, सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने का वक्त

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनोज मिश्रा और केवी विश्वनाथन की पीठ के नए फैसले के अनुसार, बच्चों से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई नहीं करने पर पॉक्सो कानून के तहत आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 15 और 39 के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिए। इस बारे में दिसंबर, 1992 में हमारे देश ने संयुक्त राष्ट्र की संधि पर भी हस्ताक्षर किए हैं। अरुणाचल प्रदेश में बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले में स्कूल प्रशासन ने पुलिस और अधिकारियों को जानकारी नहीं दी थी। ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने आरोपित शिक्षिका को बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के अनुसार, अब शिक्षिका के खिलाफ पॉक्सो और आईपीसी कानून के तहत मुकदमा चलेगा। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की 2007 की रिपोर्ट के साथ नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने बच्चों के यौन उत्पीड़न मामलों में वृद्धि पर चिंता जाहिर की थी। जून 2012 में पॉक्सो कानून के साथ विस्तृत नियम बनाए गए। बच्चों के यौन-उत्पीड़न को रोकने के लिए अमेरिका और दुनिया के दूसरे देशों में भी सख्त कानून हैं। उत्तर प्रदेश के एक इंजीनियर दंपती को बाल-यौन शोषण और अश्लील वीडियो मामले में फरवरी 2026 में सीबीआई की विशेष अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। स्मार्टफोन और इंटरनेट की डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस घेब्रेयेसस और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चिंता जाहिर की है। ऑनलाइन दुनिया में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े दो बड़े पहलू हैं। अमेरिका के चिल्ड्रेन ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट के अनुसार, 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया जॉइन नहीं कर सकते। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, यूनान, इंडोनेशिया, ब्राजील व तुर्किये जैसे अनेक देशों ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को रोकने के लिए कानून बनाए हैं। ब्रिटेन, डेनमार्क, जर्मनी, मलयेशिया, नॉर्वे, स्पेन और पुर्तगाल जैसे देशों में इस बारे में कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है। सोशल मीडिया कंपनियां डिजिटल अनुबंध के माध्यम से बच्चों के डाटा का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। यहीकारण है कि भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर अकाउंट नहीं बना सकते। कॉन्ट्रैक्ट एक्ट के अनुसार, नाबालिग बच्चे ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से पैसों का लेन-देन भी नहीं कर सकते। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी अमेरिका में रजिस्टर्ड होने की वजह से अमेरिकी कानून से संचालित होती है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केएन गोविंदाचार्य मामले में 23 अगस्त, 2013 को आदेश दिया था, जिसके अनुसार तेरह साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया जॉइन नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून की सराहना की है। भारत में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले और दूसरे कानूनों के अनुसार, मजबूत नियामक और उचित क्रियान्वयन के माध्यम से नाबालिग बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है। सोशल मीडिया में बच्चों के यौन-शोषण और अश्लील वीडियो से जुड़ी सामग्री के प्रसार से जुड़ा दूसरा मामला बेहद गंभीर है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम ने व्यावसायिक मुनाफे के लिए रिकमेंडेशन एल्गोरिदम के माध्यम से बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को भारत में बढ़ावा दिया है। सरकार की नोटिस के बाद इंस्टाग्राम ने ब्लॉग से स्पष्टीकरण देने के बाद औपचारिक जवाब भी भेजा है। कंपनी के अनुसार, पिछले छह महीनों में भारत में 1.6 लाख संदिग्ध खातों को हटाया गया है। पिछले साल दुनियाभर में फेसबुक और इंस्टाग्राम में 40 लाख से ज्यादा संदिग्ध खातों के साथ बच्चों से जुड़े 3.6 करोड़ कंटेंट हटाने का दावा भी किया गया है। 96 फीसदी मामलों में मेटा कंपनी ने आंतरिक पहचान, रिपोर्टिंग सिस्टम और एआई के माध्यम से कार्रवाई करने का दावा किया है। इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के माध्यम से बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देना आईटी कानून, बीएनएस और पॉक्सो कानून के तहत गंभीर अपराध है। इंस्टाग्राम के ब्लॉग में लिखा है कि आईटी नियम, 2021 के अनुसार, कंपनी ने मुख्य अनुपालन अधिकारी, शिकायत अधिकारी और नोडल संपर्क अधिकारी की नियुक्ति की है। ऐसे में, सवाल उठता है कि पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अमेरिका में मेटा को नोटिस भेजने के बजाय भारत स्थित नोडल अधिकारी को जवाब के लिए क्यों नहीं बुलातीं संशोधित आईटी नियमों के अनुसार, ऐसे कंटेंट को दो घंटे में हटाना चाहिए। लेकिन, इंस्टाग्राम को जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मिलने से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा का मुद्दा कमजोर हो रहा है। सोशल मीडिया कंपनियों को मध्यस्थ मानते हुए उन्हें सेफ हार्बर की कानूनी सुरक्षा मिलती है। तत्कालीन दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 2021 में ट्विटर (अब एक्स) की सेफ हार्बर की सुविधा खत्म करने की बात कही थी। गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर के भारत स्थित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की थी। आपराधिक कंटेंट को बढ़ावा देने और कानून का पालन नहीं करने वाली कंपनियों की सेफ हार्बर सुरक्षा खत्म करने के लिए आईटी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने 2023 में संसद में बयान दिया था। अमेरिका में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों का पालन नहीं करने के मामले में चार राज्यों ने मुकदमा दायर करके मेटा कंपनी से 14 खरब डॉलर हर्जाने की मांग की है। 14 अन्य राज्यों के मुकदमों की सुनवाई अगले साल फरवरी में होगी। यूरोपीय आयोग मेटा से 12 अरब डॉलर हर्जाना वसूलने की तैयारी कर रहा है। पर, भारत में भारी मुनाफा कमा रहीं विदेशी टेक कंपनियों से जुर्माना नहीं वसूलने से साइबर अपराध व डिजिटल अराजकता बढ़ रही है। बांदा के इंजीनियर दंपती को फांसी की सजा देते हुए जज ने उसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर कहा था। सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के अनुसार, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम में बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले करोड़ों गैर-कानूनी खातों और विज्ञापन दाताओं के खिलाफ पॉक्सो के तहत मामला दर्ज होना चाहिए।     edit@amarujala.com

#Opinion #National #SocialMedia #ChildSafety #PocsoAct #SupremeCourtOfIndia #ChildAbuse #Instagram #Telegram #Meta #ItRules #CyberCrime #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 14, 2026, 02:30 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




ताकि सोशल मीडिया पर बच्चे सुरक्षित हों, सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने का वक्त #Opinion #National #SocialMedia #ChildSafety #PocsoAct #SupremeCourtOfIndia #ChildAbuse #Instagram #Telegram #Meta #ItRules #CyberCrime #VaranasiLiveNews