Census and Elections: जातीय जनगणना गिनती नहीं, हिस्सेदारी की जंग... तय करेगी चुनावी समीकरण
ओबीसी की बिसात पर जातिगत जनगणना के तौर-तरीकों को लेकर सियासत शुरू हो गई है। ओबीसी की वास्तविक संख्या सामने नहीं आने की आशंका जताते हुए विपक्षी दल इसे तूल देने में लगे हैं। अगले साल सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उनमें और आगे के चुनावों में भी जातिगत जनगणना के बहाने सामाजिक न्याय का मामला तूल पकड़ेगा। उत्तर प्रदेश समेत चुनावी वाले राज्यों में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ जातिगत जनगणना का मुद्दा ओबीसी आरक्षण और प्रतिनिधित्व के इर्द-गिर्द आने लगा है, इसलिए जनगणना के नतीजे आने से पहले राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति में बदलाव शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव ने चालबाजी करार दिया सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र की जातिगत जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को चालबाजी करार दिया है। यदि केंद्र यह काम ठीक से नहीं करता, तो यूपी में सपा की सरकार बनने पर तीन महीने के भीतर जातीय जनगणना कराई जाएगी। सपा का जोर पीडीए में ओबीसी के मुद्दे को धार देना है। सत्ताधारी भाजपा भी विपक्ष के इस मुहिम को लेकर सतर्क है। तमिलनाडु के करूर सांसद ने पीएम को लिखा पत्र: तमिलनाडु के सांसद एस. ज्योतिमणि ने हाल में प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में यह सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जनगणना प्रश्नावली में एससी-एसटी के अतिरिक्त एक सुस्पष्ट ओबीसी, शैक्षिक पिछड़ा वर्ग श्रेणी को शामिल किया जाए। वर्तनी, शब्दावली या उच्चारण में होने वाली गड़बड़ियों से बचने के लिए जरूरी है कि चिह्नित जातियों और समुदायों के लिए अलग-अलग डिजिटल कोड तय किए जाएं।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 25, 2026, 03:59 IST
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