10 साल में दुनिया में 80 करोड़ बेरोजगार होंगे: विश्व बैंक अध्यक्ष की चेतावनी; क्या आर्थिक नीतियां बदलेंगी?

विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने भविष्य के रोजगार संकट को लेकर चौंकाने वाली चेतावनी जारी की है। बंगा ने अनुमान जताया है कि अगले 10-15 वर्षों में दुनिया भर के लगभग 120 करोड़ कुशल (स्किल्ड) युवा रोजगार बाजार में प्रवेश करेंगे लेकिन रोजगार 40 करोड़ को ही मिल पाएगा। बैंकॉक में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक समूह की वार्षिक बैठकों के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए बंगा ने कहा कि आने वाले समय में लगभग 80 करोड़ युवाओं के सामने बेरोजगारी का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। विश्व बैंक अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि विकासशील देश इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ उन पर विदेशी कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, तो दूसरी तरफ विकास कार्यों के लिए मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता में भारी कमी आई है। इसके साथ ही दुनिया भर में चल रहे लगातार युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक विकास भी प्रभावित हो रहा है। सरकारों के पास विकास योजनाओं और रोजगार सृजन के लिए बजट की भारी कमी है। बंगा ने वैश्विक नेताओं और नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे भविष्य को देखते हुए अपनी आर्थिक नीतियों में तत्काल सुधार करें। भारतीय उपमहाद्वीप के युवाओं पर दोहरा असर भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल) दुनिया के सबसे युवा क्षेत्रों में से है, जहां अकेले भारत के श्रम बाजार में हर साल लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) युवा प्रवेश करते हैं। नीतियों के क्रियान्वयन के आधार पर युवाओं पर इसके दोहरे प्रभाव पड़ सकते हैं। यदि विश्व बैंक के मॉडल के अनुसार निजी क्षेत्र और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ता है, तो बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण नौकरियां पैदा होंगी। इससे युवाओं को वित्तीय स्वतंत्रता और बेहतर जीवन स्तर मिलेगा। जहां विकसित देशों की आबादी बूढ़ी हो रही है, वहीं भारतीय उपमहाद्वीप के युवा यदि कौशल के मामले में अपग्रेड हो जाते हैं, तो वे वैश्विक नौकरी बाजार की जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। विश्व बैंक के कार्यक्रमों (जैसे भारत में आईटीआई का आधुनिकीकरण) में कम से कम 25% से 30% महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे युवा महिलाओं को उच्च वेतन वाली नौकरियों में आने का अवसर मिलेगा। सार्वजनिक वित्त, निजी निवेश का मॉडल सुझाया इस संकट से निपटने के लिए विश्व बैंक के अध्यक्ष ने सार्वजनिक वित्त, निजी निवेश, तकनीक और परोपकार को एक साथ जोड़ने वाला नया विकास मॉडल सुझाया है। विश्व बैंक के अनुसार, 90% नौकरियां निजी क्षेत्र से आती हैं। इसलिए, सरकारों को व्यापार-अनुकूल नियामक सुधार करने चाहिए और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराना चाहिए ताकि वे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकें। विश्व बैंक ने पांच प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है जो सबसे ज्यादा नौकरियां दे सकते हैं। इसमें बुनियादी ढांचा, मूल्यवर्धित विनिर्माण, तकनीक-संचालित कृषि, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन शामिल है। ये भी पढ़ें:2048 तक 124 लाख करोड़ डॉलर की संपत्ति होगी हस्तांतरित: महिलाओं के हाथ आएंगे 52 लाख करोड़ डॉलर; बदलेगी भूमिका विश्व बैंक ने पारंपरिक शिक्षा के बजाय युवाओं को डिजिटल तकनीक, एआई और उद्योगों की बदलती मांगों के अनुसार प्रशिक्षित करने पर जोर दिया है। इसके साथ ही दक्षिण एशिया के कार्यबल के लिए पर्यावरण के अनुकूल या 'ग्रीन जॉब्स' के लिए मौजूदा कौशलों को थोड़ा अपग्रेड या अनुकूलित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। रोजगार अंतर नहीं पाटा गया तो नकारात्मक प्रभाव भी दक्षिण एशिया में पहले से ही रोजगार की कमी के चलते युवाओं में असंतोष देखा गया है। यदि इस 80 करोड़ के वैश्विक रोजगार अंतर को पाटने में विफलता मिलती है, तो उपमहाद्वीप में सामाजिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शन बढ़ सकते हैं। स्थानीय स्तर पर सम्मानजनक नौकरियां न मिलने पर युवाओं में विदेशों की ओर पलायन करने (अवैध प्रवासन सहित) का दबाव काफी ज्यादा बढ़ जाएगा। साथ ही डिग्री होने के बावजूद सही हुनर न होने से युवा 'बेरोजगार' या 'अंडर-एम्प्लॉयड' (योग्यता से कम स्तर का काम करने वाले) रह जाएंगे, जिससे गरीबी का दुष्चक्र बना रहेगा।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 19, 2026, 04:52 IST
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