Year Ender 2025: क्या इस साल दौड़ेगी बुलेट ट्रेन; सड़क, रेल से हवाई मार्ग तक में कितना आगे बढ़ेगा देश?

साल 2025 खत्म होने में कुछ ही दिन बचे हैं। दुनिया बेसब्री से 2026 का इंतजार कर रही है। बीत रहे 2025 में सरकार ने विकास के कई कीर्तिमान स्थापित किए। अब नजरें हैं उम्मीदों भरे नए साल 2026 पर। इस साल सरकार की यातायात की कई अलग परियोजनाएं धरातल पर उतरती दिखेंगी। फिर चाहे बात बुलेट ट्रेन के संचालन की हो या फिर जेवर में बन रहे देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट की। ये परियोजनाएं न सिर्फ भारत की तस्वीर बदल देंगी बल्कि विश्व पटल पर भारत के विकास की नई तस्वीर को भी पेश करेंगी। आज हम 2026 में शुरू होने वाली परियोजनाओं पर बात करेंगे। 2027 में सूरत से बिलिमोरा के बीच होगा बुलेट ट्रेन का ट्रायल रन केंद्र सरकार ने 2015 में मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना का एलान किया था। पहले इसकी डेडलाइन 2022 रखी गई, जिसके बाद लगातार इसकी समयसीमा में विस्तार किया गया। हालांकि अब सरकार ने 2026 में बुलेट ट्रेन को चलाने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 508 किमी लंबे कॉरिडोर में 360 किमी यानी करीब 71% काम लगभग पूरा हो चुका है। जल्दी ही ट्रेन के ट्रायल शुरू होंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला चरण 2027 में सूरत-बिलिमोरा खंड पर शुरू किया जाएगा, इसके बाद 2028 में ठाणे और 2029 में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स को इसमें शामिल किया जाएगा। गुढ़ा-थथाना मिथरी हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक सरकार बुलेट ट्रेन परियोजना के साथ-साथ हाई स्पीड ट्रेनों पर भी फोकस कर रही है। इसके लिए सरकार जोधपुर डिवीजन के नवा क्षेत्र में गुढ़ा और थथाना मिथरी के बीच देश का पहला समर्पित हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक तैयार कर रही है। माना जा रहा है कि इस साल यह ट्रैक संचालन में आ सकता है। कुल 64 किलोमीटर की परियोजना में से लगभग 55 से अधिक किलोमीटर का काम पहले ही पूरा हो चुका है और पूरी परियोजना को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर डिवीजन में गुढ़ा और थथाना मिथरी के बीच 64 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक 967 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। वंदे भारत स्लीपर: इस ट्रेन का पहला प्रोटोटाइप 2026 की शुरुआत या 2026 के मध्य तक लॉन्च होने की उम्मीद है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-चेन्नई जैसे लंबी दूरी के रूट पर चलाया जा सकता है। हाइड्रोजन ट्रेन: नए साल में देश में पहली हाइड्रोजन ट्रेन ट्रैक पर दौड़ती दिख सकती है। इस साल की शुरुआत में चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में पहले हाइड्रोजन-संचालित कोच या ड्राइविंग पावर कार का परीक्षण किया गया था। 2026 में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन सोनीपत-गोहाना-जींद के बीच रफ्तार भरती नजर आ सकती है। 2026 में ये मेट्रो प्रोजेक्ट लिखेंगे विकास का इबारत -पुणे मेट्रो- (लाइन 3 - हिनजवाड़ी से शिवाजीनगर) -इंदौर मेट्रो-(17.5 किमी, गांधी नगर से रेडिसन स्क्वायर तक)। -बंगलूरू मेट्रो (नम्मा मेट्रो) 2026 में लगभग 41-175 किमी नए सेक्शन ऑपरेशनल करने की योजना -दिल्ली मेट्रो (फेज 4 में 3 प्रमुख कॉरिडोर शुरू होंगे) फेज 4 में 111 किमी लंबाई और 83 स्टेशन शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि तीन प्राथमिक कॉरिडोर पर सिविल निर्माण कार्य का लगभग 80.43 प्रतिशत पूरा हो चुका है और चरणबद्ध रूप से इन्हें दिसंबर 2026 तक चालू किए जाने की उम्मीद है। -मेरठ आरआरटीएस (नमो भारत कॉरिडोर) दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस का शेष हिस्सा (मेरठ साउथ-मोदीपुरम) नए साल में शुरू हो सकता है। नए साल में देश को मिलेगा सबसे बड़ा हवाई अड्डा इस साल शुरू होगा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन जनवरी 2026 में होना है। यह परियोजना लगभग 1,300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। इसके पहले चरण का संचालन सितंबर 2024 में शुरू होना प्रस्तावित था, लेकिन कुछ कारणों से इसमें देरी हुई। संचालन शुरू होने के बाद यह देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बन जाएगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय निवेश, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विस्तार के वैश्विक मानचित्र पर और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के माध्यम से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, जिससे माल परिवहन, निर्यात, औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला और यात्री आवागमन को निर्बाध गति मिलेगी। आंध्र प्रदेश का भोगापुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जीएमआर समूह इस परियोजना का विकास कर रहा है। भोगापुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में दुनिया की सबसे बड़ी रखरखाव एवं मरम्मत इकाई स्थापित की जाएगी। इस हवाई अड्डे के जून 2026 तक शुरू होने की संभावना है। माना जा रहा है कि 2026 के अंत तक इस पर परिचालन भी शुरू हो जाएगा। नए साल में नए भारत के विकास की गाथा लिखेंगे ये सड़क कॉरिडोर भारत में 2026 राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सड़क कॉरिडोर के लिए महत्वपूर्ण वर्ष होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट्स के अनुसार, कई प्रमुख परियोजनाएं पूरी होने के करीब हैं, जिनमें से कई का उद्घाटन या परिचालन 2026 में होने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य 2026 में 10,000 किमी से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरा करने का है। जेवर एयरपोर्ट-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, जेवर एयरपोर्ट-गंगा एक्सप्रेसवे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, के लिए ₹1246 करोड़ का प्रावधान अपने अनुपूरक बजट में शामिल किया है। यह एक्सप्रेसवे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा, जिससे राज्य की लॉजिस्टिक्स, यात्री कनेक्टिविटी और आर्थिक गति को नई दिशा मिलेगी। यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे लगभग 74-76 किलोमीटर लंबा है और यमुना एक्सप्रेसवे के 24.8 किमी पॉइंट से निकलकर गंगा एक्सप्रेसवे के 44.3 किमी पॉइंट तक जाएगा। यूपी का गंगा एक्सप्रेसवे (मेरठ और प्रयागराज के बीच) गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जो पश्चिमी और पूर्वी यूपी को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। यह देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा। एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 594 किमी है। यह मेरठ जिले के खरखौदा के पास बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज जिले के सोरांव के पास तक जाता है। यह 12 जिलों से होकर गुजरता है: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज। इसकी कुल लागत ₹36,200 करोड़ से अधिक बताई गई है। यह 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। प्रोजेक्ट को मंजूरी नवंबर 2020 में मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 दिसंबर 2021 को शाहजहांपुर में इसका शिलान्यास किया। इसे 2025 में पूरा करना था, लेकिन लगातार हो रही देरी के कारण शुरू नहीं हो सका। माना जा रहा कि इस साल इस कुछ हिस्सा खुल सकता है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे 6 लेन का है। करीब 210 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे अक्षरधाम से देहरादून तक जाता है। इस पर करीब 13,000 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड की हसीन वादियों की सैर करने जाने वाले सैलानियों, पहाड़ी राज्य से काराबोर के सिलसिले में राजधानी आने वाले व्यापारियों, उद्यमियों और आम यात्रियों के लिए परिवर्तनकारी होगा। एक्सप्रेसवे के रास्ते दिल्ली से देहरादून जाने में दो से ढाई घंटे लगेंगे, जो अभी छह से साढ़े छह घंटे लगते हैं। इस एक्सप्रेव वे के नए साल में शुरू होने की संभावना है। पूरे एक्सप्रेसवे को चार हिस्सों में बनाया गया है। सभी हिस्सों में पर्यावरणीय मानकों का खास ख्याल रखा गया है। राजाजी नेशनल पार्क में एशिया का सबसे लंबा 12 किमी का एलिवेटेड जंगल कॉरिडोर भी इसी का हिस्सा है। इस कॉरिडोर में जानवरों की आवाजाही के लिए छह अंडरपास बनाए गए हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 25, 2025, 20:53 IST
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