Portfolio: साल के अंत में पोर्टफोलियो की जरूरी पड़ताल, रिबैलेंसिंग से ही 2026 में निवेश को मिलेगा सही रिटर्न

जैसे कार को समय-समय पर सर्विसिंग की जरूरत होती है, वैसे ही आपके निवेश को भी रिबैलेंसिंग की जरूरत होती है। साल भर में शेयर बाजार कभी ऊपर जाता है, तो कभी नीचे और इस चक्कर में आपका एसेट एलोकेशन बिगड़ जाता है। 2025 का बाजार चुनिंदा बढ़त वाला रहा है। इंडेक्स बढ़े, पर शेयर गिरे। करीब 3800 प्रमुख स्टॉक्स में से 75 फीसदी साल के अंत में नुकसान में थे। यहां हर किसी ने पैसा नहीं बनाया, बल्कि जिसने रणनीति बदली, वही टिका रहा। अगर आप 2026 में अपनी आर्थिक नाव को बचाना चाहते हैं तो रिबैलेंसिंग करना जरूरी है। क्यों बिगड़ जाता है एसेट एलोकेशन बाजार स्थिर नहीं रहता। मान लीजिए आपने इस साल की शुरुआत में 10 लाख रुपये निवेश किए, 6 लाख रुपये शेयरों में और 4 लाख रुपये एफडी या बॉन्ड में। इस साल शेयर बाजार करीब 10% चढ़ गया। ऐसे में आपके 6 लाख रुपये बढ़कर 6.6 लाख रुपये हो गए। वहीं, एफडी पर 7% की दर से आपको लगभग 4.28 लाख रुपये मिले। अब आपका कुल पोर्टफोलियो लगभग 10.88 लाख रुपये का हो गया और एसेट एलोकेशन बदलकर करीब 61:39 हो गया। देखने में यह ज्यादा अंतर नहीं लगता, लेकिन याद रखिए, जैसे-जैसे इक्विटी का हिस्सा बढ़ता है, वैसे-वैसे उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बढ़ जाता है। अगर आगे चलकर बाजार 10% गिरता है, तो आपके बढ़े हुए इक्विटी हिस्से पर असर ज्यादा पड़ेगा। रिबैलेंसिंग इसी जोखिम को मैनेज करने की कवायद है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 29, 2025, 05:29 IST
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