सर्दी का सितम: बढ़ते प्रदूषण के चलते जटिल हुई कोहरे की समस्या, गरीब सबसे ज्यादा प्रभावित
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत लगभग पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी के कारण शीतलहर का प्रकोप तो शुरू हो ही गया है, कोहरे की वापसी ने यातायात में भी भारी व्यवधान डाला है, जिससे जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। दरअसल, पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भीषण ठंड के रूप में महसूस किया जा रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि शीतलहर के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। घना कोहरा छाए रहने से जहां हवाई उड़ानों के साथ-साथ कई ट्रेनें भी घंटों देरी से चल रही हैं, वहीं सड़कों पर वाहन चालकों की रफ्तार भी थम गई है, क्योंकि दृश्यता कम होने से सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। पिछले दिनों कोहरे के चलते कई भीषण सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें कई जानें चली गईं। ऐसे में, सड़कों पर वाहनों को सावधानीपूर्वक चलाना ही बेहतर होगा। विचारणीय यह भी है कि उत्तर भारत में बढ़ते शहरीकरण, प्रदूषण, पराली जलाने जैसी गतिविधियां और बदलते जलवायु पैटर्न के कारण हर सर्दी में कोहरे व शीतलहर की समस्या जटिल हो जाती है। सर्दी के मौसम में तापमान में गिरावट को रोका नहीं जा सकता, लेकिन वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के जरिये कोहरे के कहर को जरूर कम किया जा सकता है और कुछ सावधानियों से सर्दी से होने वाले नुकसान को भी। चरम मौसमी स्थितियों का असर सभी लोगों पर एकसमान नहीं पड़ता। संपन्न वर्ग तो गर्म कपड़े एवं हीटर आदि की व्यवस्था करके खुद का बचाव कर सकता है, पर गरीबों पर इसकी मार कई तरह से पड़ती है। सर्दियों में पाला पड़ने से फसलों की उत्पादकता तो प्रभावित होती ही है, खेतों में काम करने वाले किसानों पर भी सर्दी का सितम भारी पड़ता है, जिसका उल्लेख प्रेमचंद ने पूस की रात में किया है। ठिठुरन बढ़ने से खुले में आजीविका कमाने वालों के लिए बड़ी मुश्किल पैदा हो जाती है। खासकर, कमजोर एवं गरीब लोगों के अलावा बुजुर्ग और बच्चों की सेहत पर इसका बुरा असर पड़ता है। इसलिए राज्य सरकारों द्वारा स्कूलों में छुट्टियां घोषित करना उचित ही है। सरकार एवं प्रशासन को गरीब व बेघर लोगों के लिए पर्याप्त रैन बसेरों एवं कंबल वितरण की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि ठंड से किसी की जान न जाए। बहुत-से लोग अलाव जलाकर ठंड से बचने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन इससे हवा और जहरीली हो सकती है, इसलिए ऐसे लोगों की मदद के लिए सरकार के साथ समाज को भी आगे आना चाहिए। सर्दी से निपटने के लिए तात्कालिक प्रबंधन के साथ वायु प्रदूषण से निपटने के दीर्घकालिक उपाय-जैसे, स्वच्छ ईंधन, प्रदूषण नियंत्रण, हरित आवरण का विस्तार और जलवायु अनुकूल शहरी नियोजन, पर गंभीरता से काम करना होगा।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 08, 2026, 07:07 IST
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