ईरान की जंग में उतरेगा पाकिस्तान?: आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री के बीच हुई बड़ी बैठक; जानें इसके मायने
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब सीधे निशाने पर है। खाड़ी के इस देश के ऑयल फील्ड और एयरपोर्ट पर लगातार हमले हो रहे हैं। इसी बीच रियाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान की अहम बैठक हुई। बैठक में ईरान के हालिया हमलों और उन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा हुई। सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बैठक संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत हुई और इस दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने पर जोर दिया। Met with Pakistans Chief of Army Staff and Chief of Defense Forces, Field Marshal Asim Munir. We discussed Iranian attacks on the Kingdom and the measures needed to halt them within the framework of our Joint Strategic Defense Agreement. We stressed that such actions undermine… pic.twitter.com/OuELnf9LU6 — Khalid bin Salman خالد بن سلمان (@kbsalsaud) March 7, 2026 सऊदी अरब के ऑयल फील्ड पर हमले हाल के दिनों में ईरान ने सऊदी अरब के शायबा ऑयल फील्ड को निशाना बनाया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि छह ड्रोन को मार गिराया गया, जबकि दो बैलिस्टिक मिसाइलें प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास नष्ट की गईं। यह क्षेत्र यूएई की सीमा के पास स्थित है और पिछले हमलों के बाद अब ईरान सीधे इसमें शामिल हो रहा है। क्या बढ़ेगी पश्चिम एशिया में जंग ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अहम हो गई है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में खुलासा करते हुए कहा कि हाल के दिनों में ईरान द्वारा सऊदी अरब पर हमलों में कमी या प्रतिक्रिया न देने के पीछे पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल रही है। यह खुलासा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना देता है। ये भी पढ़ें:-West Asia War:ईरान पर आज होगा अब तक का सबसे घातक हमला जंग के बीच इस्राइल को मिलेगी ताकत, अमेरिका देगा हथियार पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका का खुलासा इशाक डार ने बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ एक रणनीतिक रक्षा समझौता है। जब ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ा, तो पाकिस्तान ने तत्काल ईरान से संपर्क किया। पाकिस्तान ने ईरान को इस रक्षा समझौते के बारे में आगाह किया और आश्वासन मांगा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान ने ईरान को यह आश्वासन भी प्रदान किया। इस कूटनीतिक प्रयास ने तत्काल टकराव को टालने में मदद की। जंग फैलने की आशंका अब तक चल रहे संघर्ष में खाड़ी देशों ने सीधे टकराव से खुद को दूर रखा था और अमेरिका ने भी इन देशों की जमीन का इस्तेमाल अपने हमलों के लिए नहीं किया था। हालांकि, अगर ईरान द्वारा सऊदी अरब पर हमले जारी रहते हैं और सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौता सक्रिय हो जाता है, तो स्थिति पूरी तरह से बदल सकती है। यदि पाकिस्तान सऊदी अरब की ओर से ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो यह संघर्ष केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। यह सीधे तौर पर दक्षिण एशिया में भी फैल जाएगा, क्योंकि पाकिस्तान और ईरान के बीच एक लंबी सीमा लगती है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 07, 2026, 08:36 IST
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