Agra News: जब उठ गए बंजारों के डेरे...नम हो गईं आंखें

आगरा। उठ गए बंजारों के डेरे…यह पंक्ति जब कथाकार सत्यनारायन की कहानी रामी से गूंजी, तो नागरी प्रचारिणी सभा का सभागार कुछ क्षणों के लिए मौन हो गया। शनिवार को आयोजित किस्सा कहानी-2 कार्यक्रम में प्रेम, प्रकृति के दर्द को एक साथ दिखाया। शुरुआत संस्था के सहयोगी स्व. डॉ. अखिलेश श्रोत्रिय को श्रद्धांजलि से हुई।मुख्य वक्ता विलासपुर (छत्तीसगढ़) से आए कथाकार राम कुमार तिवारी ने हिंदी कहानी की दशा और दिशा पर कहा कि हिंदी साहित्य की नई चेतना छोटे शहरों से आकार ले रही है। साहित्य केवल सृजन नहीं, बल्कि मनुष्य को गढ़ने वाला भाषाई और सांस्कृतिक निवेश है। उन्होंने साहित्यिक पत्रिकाओं की निरंतरता को भी जरूरी बताया। कार्यक्रम का केंद्र रही सत्यनारायन की कहानी रामी, जिसमें बंजारा जीवन, प्रकृति से जुड़ा प्रेम और विकास के नाम पर उजाड़े जाने की पीड़ा उभरकर आई। समीक्षक शक्ति प्रकाश ने कहानी को सच्चे प्रेम का शोकगीत कहा। डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहानी को प्रेमचंद की परंपरा से जोड़ते हुए प्रभावशाली बताया। दिलीप रघुवंशी और डॉ. शशि तिवारी ने इसे विकास बनाम विनाश की कथा कहा। राम गोपाल सिंह वर्मा ने देशज शब्दों और शिल्प की सराहना की। डॉ. राजीव शर्मा, डॉ. मधु भारद्वाज और डॉ. सुषमा सिंह ने कहानी की संवेदनात्मक शक्ति को रेखांकित किया। ब्रज मोहन लाल बिरजू ने कथाकार और उनकी कहानी को समर्पित कविता सुनाई। कथाकार राम कुमार तिवारी ने भी कथा की सराहना की। अध्यक्षता कथादेश के संपादक हरि नारायण ने की। विषय परिवर्तन अनिल शुक्ला ने किया। स्वागत डॉ. महेश धाकड़ ने किया। संचालन डॉ. विजय शर्मा और धन्यवाद ज्ञापन मनोज सिंह ने किया। इस दौरान जोशना बनर्जी, डॉ. मुनीश्वर गुप्ता, ओम ठाकुर, शंकर देव तिवारी, प्रमोद सारस्वत, सीमांत साहू, डॉ. रामेंद्र शर्मा, उमा शंकर पाराशर, डॉ. अर्निका माहेश्वरी, मन्नू शर्मा, तुषार खन्ना, पूनम भार्गव, ज़ाकिर सरदार आदि मौजूद रहे।

#WhenTheNomads'TentsWereUprooted...eyesBecameMoist #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 14, 2025, 02:50 IST
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