West Asia War: युद्ध से 50 लाख टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन, कम प्रदूषित 84 देशों से भी ज्यादा
युद्ध के चलते पर्यावरण पर बड़ा असर पड़ा है। क्लाइमेट एंड कम्युनिटी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के पहले दो हफ्तों में करीब 50 लाख टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ है। यह दुनिया के 84 कम प्रदूषण वाले देशों के कुल उत्सर्जन से भी ज्यादा है। 20 हजार इमारतें क्षतिग्रस्त, 24 लाख टनकार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा उत्सर्जन नागरिक ढांचे के नुकसान से हुआ है। ईरान की राहत और बचाव एजेंसी रेड क्रिसेंट के अनुसार, हमलों में करीब 20,000 इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे 24 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध में इस्तेमाल लड़ाकू विमान, स्टेल्थ बॉम्बर व नौसैनिक बेड़े लगातार ऊर्जा खपत बढ़ा रहे हैं। तेहरान और अन्य इलाकों में तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों से भी उत्सर्जन में वृद्धि हुई है। इन हमलों में 25 लाख से 59 लाख बैरल तेल नष्ट हुआ, जिससे करीब 18.8 लाख टन कार्बन उत्सर्जन हुआ। सैन्य वाहनों के संचालन से 15 से 27 करोड़ लीटर ईंधन खर्च रिपोर्ट के अनुसार, विमान, जहाज और अन्य सैन्य वाहनों के संचालन में 14 दिनों में 15 से 27 करोड़ लीटर ईंधन खर्च हुआ। इससे लगभग 5.29 लाख टन कार्बन उत्सर्जन हुआ। सैन्य उपकरणों के नुकसान से भी उत्सर्जन बढ़ा है। अमेरिका के चार और ईरान के 28 विमान नष्ट हुए, साथ ही 21 नौसैनिक जहाज और करीब 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट हुए, जिससे लगभग 1.72 लाख टन कार्बन उत्सर्जन हुआ। मिसाइल और ड्रोन के उपयोग से अतिरिक्त 55,000 टन उत्सर्जन हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल उत्सर्जन 50,55,016 टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर है, जो कुवैत या आइसलैंड जैसे देशों के सालाना उत्सर्जन के बराबर है। अन्य वीडियो
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 23, 2026, 04:05 IST
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