वॉलीबॉल: तकनीक, रफ्तार और रिफ्लेक्स का तालमेल, महज तीन सेकेंड में लेना होता है फैसला; आशीष ने बताए तरीके
वॉलीबॉल देखने में भले ही आसान खेल लगे लेकिन इसे खेलना दिमाग, तकनीक और रिफ्लेक्स का असाधारण तालमेल मांगता है। गेंद हवा में उड़ती नहीं, बल्कि गोली की रफ्तार से खिलाड़ी की ओर आती है। ऐसे में खिलाड़ी के पास फैसला लेने के लिए महज तीन सेकेंड का समय होता है, कि वह रिसीव करे, पास दे या फिर अटैक खेले। सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में चल रही 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में यह नजारा साफ देखने को मिल रहा है। पुरुष और महिला वर्ग के खिलाड़ी जब सर्विस करते हैं, तो गेंद की गति 110 से 115 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। इतनी तेज रफ्तार में गेंद महज तीन सेकेंड में विपक्षी पाले में पहुंच जाती है। पूर्व वॉलीबाल खिलाड़ी और प्रतियोगिता की तकनीकी समिति के सदस्य डॉ. आशीष कुमार सिंह बताते हैं, तेज गति से आती गेंद पर खिलाड़ी को पलक झपकते निर्णय लेना होता है कि वह किस तरह का शॉट खेलेगा। एक छोटी सी चूक पूरे पॉइंट का रुख बदल सकती है। यही वजह है कि वॉलीबॉल में तकनीक के साथ-साथ मानसिक सतर्कता भी उतनी ही जरूरी होती है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 07, 2026, 22:01 IST
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