विवेक विहार अग्निकांड: राख के बीच मुस्कुरा रही तस्वीर, बिखरा पड़ा सुहाग का सामान, मंजर देखकर आंखें हुईं नम
राजधानी दिल्ली के विवेक विहार के बी-13 की तीसरी मंजिल पर राख के बीच एक मुस्कुराती तस्वीर पड़ी है। यह तस्वीर देखकर कलेजा बाहर को आ जाता है। आंखें नम हो जाती हैं। तस्वीर के आसपास बिखरे सुहाग के निशान कभी न भूलने वाली एक बड़ी त्रासदी के दर्द को बयां करती हैं। इस राख में किसी के कान की बाली है, तो किसी के झुमके पड़े हैं। हाथों में पहने वाली लाल चूड़ी अब भूरा हो चुका है। कंगन का रंग फीका हो गया है। मांग में भरने वाला सिंदूर राख के साथ मिलकर कर काला हो गया है। मांग टीका अब मलबे के नीचे दबा हुआ है। लाल का रंग का जोड़ा स्याह हो गया है। बच्चे, बूढ़े और जवान सभी के कपड़े जलकर खाक हो गए हैं। जिस थाली में भोजन रहता था, उसमें अब राख और मलबे का ढेर पड़ा हुआ है। रिश्तेदार राख में ढूंढ रहे थे नितिन, शैली और समायकन की निशानी : परिवार को अंतिम विदाई देने के बाद परिवार चौथी मंजिल पर नितिन, शैली और समायकन के आखिरी निशानी ढूंढ रहे थे। कड़ी मशक्कत के बाद रिश्तेदारों को राख में दबा हुआ नितिन की घड़ी, शैली के कानों के झुमके और नाक की छोटी नथ मिले, तो रिश्तेदार फफक कर रो पड़े। उन्होंने इन चीजों को बहुत ही प्यार से संभाल कर एक कटोरी में रख दिए। साथ ही, उन्होंने इधर-उधर बिखरे हुए कीमती चीजों को इकट्ठा किया और उसे अपनी हथेली पर रखकर बहुत ही देर तक देखते रहे और नितिन, शैली और समायकन के यादों को स्मरण करने लगे। उस दौरान दस रुपये के सिक्के और अर्ध जले रुपये के नोट भी मिले। बच्चों की किलकारी और बुजुर्गों की डांट से गूंजने वाला घर अब मातम में तब्दील सोमवार को भी पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर आग में जले हुए कुर्सी, पंखा, अलमारी, साइकिल और बालकनी में हवा के सहारे झूल रहे झूला वर्षों तक याद रखने वाली एक बड़ी त्रासदी की दर्द को बयां करती दिखीं। बाहर दिख रहे सुंदर घर में अंदर राख ही राख बिखरा हुआ है। कभी बच्चों की किलकारी और बुजुर्गों की डांट से गूंजने वाला यह घर अब मातम में तब्दील हो गया है। घर के अंदर जो भी रिश्तेदार और करीब वहां बिखरे राख और मलबे को देखने पहुंच रहे थे, उनकी आंखें नम हो जाती थी। उनकी एक भयानक त्रासदी की याद आ जाती थी। घर में बिखरे हुई चीजें दुनिया छोड़ कर चले गए परिवारों की याद को तरोताजा कर देती थी। उन्हीं में एक नितिन जैन के जीजा प्रवीण जैन भी शामिल हैं। नहीं रहे नितिन, रह गया, तो उनका बैग चौथी मंजिल पर नितिन की यादों से जुड़ीं चीजें ढूंढ रहे एक रिश्तेदार ने बताया कि यह बैग नितिन का है।नितिन ने इसे वर्षों से संभाल कर रखे हुए थे। वो कहीं बाहर जाते थे, तो इस बैग को अपने साथ लेकर चलते थे। नवीन की हालत स्थिर, काउंसलिंग शुरू विवेक विहार हादसे में घायल हुए नवीन जैन का सफदरजंग अस्पताल में उपचार जारी है। अस्पताल के बर्न एंड प्लास्टिक विभाग में भर्ती किया है। नवीन की उपचार के अलावा ट्रामा से बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग भी की जा रही है। अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि मरीज को जीटीबी अस्पताल से रेफर करके उपचार के लिए भेजा गया था। इस हादसे में मरीज 30 फीसदी झुलस गया है। चेहरे पर इंजरी ज्यादा है। मरीज की हालत स्थिर है। उपचार के लिए वार्ड में भर्ती किया है। साथ ही मरीज को ट्रामा से बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग की जा रही है। इस हादसे में नवीन ने अपनी पत्नी शिखा जैन को खो दिया है।नवीन को पहले उपचार के लिए जीटीबी अस्पताल में भर्ती किया था। इसके बाद फिर मरीज की इच्छा पर सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस हादसे में नौ लोगों की जान गई है, तीन लोग घायल हो गएहै।
#CityStates #Delhi #DelhiNcr #DelhiNews #DelhiFireTragedy #VivekViharNews #VaranasiLiveNews
- Source: www.amarujala.com
- Published: May 05, 2026, 03:59 IST
विवेक विहार अग्निकांड: राख के बीच मुस्कुरा रही तस्वीर, बिखरा पड़ा सुहाग का सामान, मंजर देखकर आंखें हुईं नम #CityStates #Delhi #DelhiNcr #DelhiNews #DelhiFireTragedy #VivekViharNews #VaranasiLiveNews
