विंध्याचल धाम: नेपाल राजवंश, गुरु गोविंद से लेकर राजघरानों, अखाड़ों, नगर वधुओं और सपेरों के भी तीर्थ पुरोहित

विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन कराने वाले तीर्थ पुरोहितों और उनके यजमानों के रिश्ते पीढ़ियों से दर्ज हैं। 14वीं शताब्दी तक के यजमानों की बही पुरोहितों के पास संरक्षित हैं, जिनमें यजमानों के अनुभव तक दर्ज हैं। श्री विंध्य पंडा समाज में पंजीकृत 1200 पुरोहितों में से कोई नेपाल राजवंश का तो कोई गुरु गोविंद सिंह, महाराजा रणजीत सिंह का तीर्थ पुरोहित है। इनमें देश के कई राजघरानों के अलावा अखाड़ों, सपेरों और नगर वधुओं के भी तीर्थ पुरोहित हैं। इन पुरोहितों के पास राजवंश से जारी पत्र और मुहर भी मौजूद हैं। तीर्थ पुरोहित त्रियोगी नारायण मिश्र उर्फ मिट्ठू के पास 14वीं शताब्दी की एक बही है। जीर्ण-शीर्ण हो चुकी बही में 14 से ज्यादा पीढ़ियों के नाम दर्ज हैं। त्रियोगी नारायण मिश्र बताते हैं कि पितृपक्ष में तर्पण के दौरान यजमान फोन करके अपने पितरों के नाम पूछते हैं। तीर्थ पुरोहित रामू मिश्रा का दावा है कि नेपाल के तत्कालीन राजा ज्ञानेंद्र प्रताप ने उनके पूर्वजों को लाल मुहर लगाकर एक पत्र दिया था जिसमें पूर्वजों को विंध्य धाम में दर्शन-पूजन के लिए अधिकृत किया गया था, तब से नेपाल राज परिवार को उनका ही परिवार मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन करवाता है। इसे भी पढ़ें;वाराणसी: चीनी मांझे से मौत के जिम्मेदार अज्ञात हैं, पुराने मामले और उसकी जांच पर खड़े हुए सवाल इसी प्रकार राजा मांडा, दशनाम अखाड़ा के पुरोहित तरुण पांडेय छड़हा पंडा हैं। उनके अलावा रंका स्टेट और कश्मीर स्टेट के भी पुरोहित हैं। नगर वधुओं, किन्नरों और सपेरों के हैं अधिकृत पंडा विंध्य धाम में सपेरों, किन्नरों और नगर वधुओं के भी अधिकृत पंडा हैं। आगरा, सतना, जबलपुर, मिर्जापुर से आने वाली नगर वधुओं को पुरोहित मुन्ना मोछा दर्शन कराते हैं। इसी प्रकार तेजन गिरी किन्नर अखाड़ा के श्रद्धालुओं को दर्शन कराते हैं। पम्मी गिरी और भवानी मां को भी वही दर्शन कराते हैं। वहीं शंकरगढ़ सहित विभिन्न जिलों में रहने वाले सपेरों के पंडा बादल मिश्रा हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 14, 2026, 20:32 IST
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