अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा में योगेश्वर श्रीकृष्ण एवं सिद्ध योगियों की महारास लीला का हुआ व्याख्यान

रामनगरी अयोध्या के सिरसा में श्रीमद्भागवत का आयोजन हो रहा है। कथा के छठे दिन प्रवाचक आचार्य ज्ञानचंद्र द्विवेदी ने कहा कि महारास योगेश्वर श्रीकृष्ण एवं सिद्ध योगियों की लीला है। यह काम के पराभव की भी लीला है। कथा व्यास जी ने कहा कि वासना व प्रेम का बाहरी रूप एक जैसा है दिखाई पड़ता है इसलिए महारास के विषय में भ्रम होता है प्रेम में स्वसुख की अपेक्षा नहीं होती। प्रियतम को सुख पहुंचाना ही प्रेमास्पद का मूल भाव है। प्रसंग में आगे कहा की इसके बाद भगवान ने पृथ्वी पर पाप अंत करने के लिए कंस का वध किया आतंक का समन ही कंस वध है। इसके बाद जगत को शिक्षा देने के लिए गुरुकुल में जाकर शिक्षा ग्रहण की। द्वारिका की स्थापना विश्वकर्मा को बुलवाकर किया। 48 कोस दिव्य क्षेत्र मे द्वारिका का निर्माण कराया ।निर्माण के उपरांत निर्माण करने वाले कारीगर ही भ्रमित हो गए और द्वारका मतलब द्वार कहां है कहने लगे इस कारण उसका नाम द्वारका पड़ा। श्री कृष्ण ने 16108 कन्याओं से विवाह किया। असल मैं 16108 वेद ऋचाएं हैं वेद में तीन कांड है और 100000 मन्त्र है। पहला कर्मकांड दूसरा उपासना कांड तीसरा ज्ञान कांड। कर्मकांड में 80000 मंत्र आते हैं यह ब्रह्मचारियों के लिए है उपासना कांड में 16000 मंत्र आते हैं यह गृहस्थों के लिए है ज्ञानकांड में 4000 मंत्र आते हैं यह बानप्रस्थ के लिए है ।उपासना कांड के ही मंत्र गृहस्थो की वेद ऋचाएं है जो ब्रह्म स्पर्श पाने के लिए ही कन्याओं के रूप में अवतरित हुई भगवान के अंस में मिलकर अपने मूल तत्व में समाहित हुई ।कथा में मुख्यजमान उमेश चन्द्र मिश्रा, तेज बहादुर सिंह,सत्य प्रकाश मिश्रा सत्तू,सुशील तिवारी,गिरीश चंद्र चतुर्वेदी,जगराम ,राम उजागिर,शीतला शुक्ला,शेखर दुबे,अरुण पाण्डेय, बुलट सिंह सहित श्रोता मौजूद रहे।

अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा में योगेश्वर श्रीकृष्ण एवं सिद्ध योगियों की महारास लीला का हुआ व्याख्यान #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 15, 2026, 09:37 IST
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