वेनेजुएला का संकट: हालात के लिए मादुरो की नीतियां भी कम जिम्मेदार नहीं

पिछले कुछ महीनों से ट्रंप कैरिबियाई सागर में सैन्य तैनाती करके जिस तरह से वेनेजुएला पर दबाव बना रहे थे, उसकी चरम परिणति वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी के रूप में सामने आई है। एक वर्ग मादुरो के प्रति सहानुभूति दिखा रहा है, पर यह भी सच है कि उनके शासन में पिछले कई वर्षों से वेनेजुएला गंभीर राजनीतिक, आर्थिक व मानवीय संकट से जूझ रहा है। मादुरो पर चुनाव में धांधली करने, विपक्ष का दमन करने, मीडिया की स्वतंत्रता का हनन करने, व्यापक भ्रष्टाचार और देश को तानाशाही की ओर धकेलने के आरोप लगते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें मादुरो के समर्थकों द्वारा उनके राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ एक दशक से अधिक समय तक की गई हत्याओं, यातनाओं, यौन हिंसा और मनमानी गिरफ्तारियों का ब्यौरा दिया गया है। जाहिर है, कानून से ऊपर उठकर अपने ही नागरिकों पर अत्याचार करने को उचित नहीं कहा जा सकता है। जैसा कि संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायोग का कहना है, वेनेजुएला के अस्सी लाख लोग देश से बाहर जाने पर मजबूर हुए हैं। यह दर्शाता है कि मादुरो शासन न केवल जनता की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में विफल रहा, बल्कि बड़े पैमाने पर वहां मानवाधिकार उल्लंघन के भी मामले सामने आए। यही नहीं, निकोलस मादुरो पर नार्को टेररिज्म, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध से भी जुड़े होने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में, उनकी गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय न्याय और जवाबदेही की दिशा में अगर एक आवश्यक कदम माना जाए, तो यह अतार्किक नहीं होगा। हालांकि, ट्रंप कह रहे हैं कि अमेरिका का उद्देश्य वेनेजुएला की संपत्ति या शासन पर सैन्य कब्जा करना नहीं है, बल्कि वहां लोकतंत्र की बहाली है, लेकिन यह भी है कि वहां के तेल के कुओं का लाभ अब अमेरिका को मिल सकता है। भारत को इस संदर्भ में अपने रणनीतिक हितों को देखते हुए सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया ही जतानी चाहिए, जैसा कि वह दिखा भी रहा है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के साथ भारत का व्यापार समझौता होने के कगार पर है और वह भारत का रणनीतिक साझेदार है, जबकि वेनेजुएला से भारत के संबंध उतने मजबूत नहीं हैं। भारत ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और उनकी भलाई के लिए अपने समर्थन को दोहराया है तथा सभी संबंधित पक्षों से अपील की है कि मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिये शांतिपूर्ण तरीके से किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनी रहे। मादुरो की गिरफ्तारी वेनेजुएला के लोगों के लिए एक बेहतर भविष्य का अवसर हो सकती है, पर अमेरिकी कदम को अंतरराष्ट्रीय कानूनों एवं कूटनीति व राजनीतिक आशंकाओं के आलोक में अवश्य परखा जाना चाहिए।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 05, 2026, 07:38 IST
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