नागरिक को टावर पर चढ़ना ही क्यों पड़े?: जमीन से नहीं पहुंचती फरियाद, न्याय के लिए ऊंचाई को सहारा बना रहे लोग

पिछले कुछ समय में एक ऐसी प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है, जो शासन और समाज के रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लगातार खबरें आ रही हैं कि कोई व्यक्ति अपनी मांगें मनवाने या न्याय पाने की उम्मीद में पानी की टंकी, मोबाइल टावर, बिजली के खंभे या किसी ऊंची इमारत पर चढ़ गया। नीचे प्रशासनिक अमला, पुलिस बल और तमाशबीनों की भीड़ जमा होती है। घंटों की मशक्कत के बाद अधिकारी बातचीत करते हैं, आश्वासन देते हैं और किसी तरह उस व्यक्ति को सुरक्षित नीचे उतारते हैं। जिस तेजी से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, इसे व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। जब किसी नागरिक को अपनी बात सुनाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़े, तो सवाल उस व्यक्ति की मनोदशा से अधिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठता है। प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की एक महिला पानी की टंकी पर इसलिए चढ़ती है, क्योंकि उसके पति की मौत के मामले में केस दर्ज होने के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। गोंडा में दो अधिवक्ता इसलिए पानी की टंकी पर चढ़ गए, क्योंकि एक के पिता के दो हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो रही थी और दूसरे की शिकायत पर राजस्व महकमा चकरोड से अवैध कब्जा नहीं हटवा रहा था। लखनऊ में बदहाल सड़क व जलभराव, शाहजहांपुर में ऋण स्वीकृत करने में धोखाधड़ी करने वालाें पर कार्रवाई न होने, गोरखपुर, प्रतापगढ़ व गाजीपुर में भूमि विवाद संबंधी मामलों में कार्रवाई में सुस्ती के खिलाफ पानी की टंकी पर चढ़ने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। शिकायतों के समाधान के लिए तहसील दिवस, थाना समाधान दिवस, जिला स्तरीय जनसुनवाई और जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों के साथ मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल जैसे कई मंच उपलब्ध होने के बावजूद ऐसी घटनाएं चिंताजनक हैं। इन घटनाओं का संदेश एक ही है कि लोगों की बातें सुनने में संवेदनशीलता व तत्परता नहीं दिखाई जा रही है। प्रशासनिक मशीनरी के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। इस प्रवृत्ति का एक मनोवैज्ञानिक पक्ष भी है। लोग देख रहे हैं कि सामान्य आवेदन महीनों तक फाइलों में दबे रहते हैं। लेकिन, जैसे ही कोई व्यक्ति ऐसा कदम उठाता है, पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में आ जाता है। अधिकारी बातचीत करते हैं। मीडिया कवरेज शुरू हो जाती है और समस्या अचानक महत्वपूर्ण बन जाती है। इससे समाज में यह धारणा बनती है कि व्यवस्था को जगाने के लिए असामान्य कदम उठाने जरूरी हैं। जब लोग देखते हैं कि किसी की मांग पर ध्यान इसलिए दिया गया, क्योंकि उसने अपनी जान जोखिम में डाल दी, तो वे भी उसी रास्ते को प्रभावी मानने लगते हैं। सोशल मीडिया ने इस प्रवृत्ति को और बल दिया है। खास बात यह है कि ऐसे मामलों की जब पड़ताल होती है, तो प्राय: इसमें प्रशासनिक शिथिलता या विषय को नजरंदाज करने की प्रवृत्ति ही सामने आती है। ज्यादातर मामले समझाने-बुझाने या प्रारंभिक स्तर पर ही उचित कार्रवाई से निपट जाने वाले होते हैं। ऐसे में, इस गंभीर हाेती जा रही समस्या के समाधान दो स्तरों पर खोजने होंगे। पहला, शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को प्रभावी बनाना होगा। इसके लिए आम लोगों की समस्याओं की जमीनी जांच-पड़ताल व कार्रवाई से जुड़े लेखपालों, राजस्व निरीक्षकों, ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों के पदों को तत्काल बढ़ाने पर विचार करने और रिक्त पदों को भरने की जरूरत है। ज्यादातर कार्मिकों के पास एक से अधिक क्षेत्र के काम का बोझ होता है, जो जन शिकायतों के कागजी निस्तारण का मुख्य कारण माना जाता है। दूसरा, प्रशासन को जनता के साथ संवाद की संस्कृति विकसित करनी होगी। जिला और तहसील स्तर पर नियमित जनसंवाद, गांवों में जनसुनवाई शिविर और स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी लोगों में भरोसा पैदा कर सकती है। जब नागरिकों को लगेगा कि उनकी बात बिना तमाशे के भी सुनी जाएगी, तब वे टंकी या टावर पर चढ़ने की आवश्यकता महसूस नहीं करेंगे। लोकतंत्र की सफलता इस बात से नहीं तय होती कि संकट के समय कितने अधिकारी मौके पर पहुंचे, बल्कि इससे तय होती है कि नागरिक को संकट पैदा करने की जरूरत ही क्यों पड़ी। लोकतंत्र की असली ताकत यह नहीं है कि कोई व्यक्ति टावर पर चढ़ जाए और उसके बाद अधिकारी सक्रिय हो जाएं। लोकतंत्र की असली ताकत यह है कि नागरिक को टावर पर चढ़ने की जरूरत ही न पड़े। लोकतंत्र तब मजबूत माना जाएगा, जब जमीन पर खड़े नागरिक की आवाज भी उतनी ही गंभीरता से सुनी जाएगी, जितनी कि किसी टावर की ऊंचाई से सुनाई देती है। यूपी की प्रशासनिक मशीनरी को इस संदेश को समझने का वक्त है।        edit@amarujala.com

#Opinion #National #UttarPradesh #Administration #PublicGrievances #Tank #Protest #MobileTower #AdministrativeLapses #PublicHearing #Governance #Public #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 12, 2026, 02:18 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




नागरिक को टावर पर चढ़ना ही क्यों पड़े?: जमीन से नहीं पहुंचती फरियाद, न्याय के लिए ऊंचाई को सहारा बना रहे लोग #Opinion #National #UttarPradesh #Administration #PublicGrievances #Tank #Protest #MobileTower #AdministrativeLapses #PublicHearing #Governance #Public #VaranasiLiveNews