US Politics: ट्रंप अपनी ही पार्टी के सांसदों से घिरे, चुनाव में धांधली की जांच में दखल पर कटघरे में राष्ट्रपति

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से 2020 के चुनाव नतीजों को पलटने की कोशिशों की जांच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। रिपब्लिकन सांसदों ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान कुछ मौजूदा सांसदों के फोन रिकॉर्ड हासिल करने के लिए हद से ज्यादा दखल देने वाले तरीकेअपनाए गए। मंगलवार को सीनेट की एक सुनवाई में रिपब्लिकन नेताओं ने बड़ी टेलीकॉम कंपनियों से सवाल किए कि उन्होंने अभियोजकों को सांसदों के फोन रिकॉर्ड क्यों दिए मामले में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि अगर ऐसा किसी डेमोक्रेट सांसद के साथ होता, तो यह दुनिया भर की सुर्खियां बनता। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि मेरे साथ जो हुआ, मैं उसका हकदार था। जांच के दौरान अभियोजकों ने उन सांसदों के कॉल रिकॉर्ड लिए थे, जिनसे ट्रंप ने 6 जनवरी 2021 को संपर्क किया था। उस दिन कांग्रेस में जो बाइडन की जीत की पुष्टि हो रही थी। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया कि रिकॉर्ड में सिर्फ यह जानकारी थी कि कॉल कब हुई और कितनी देर चली। बातचीत की सामग्री रिकॉर्ड नहीं की गई थी। ये भी पढ़ें:-US: दो प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद बवाल, ICE प्रमुख ने कांग्रेस के सामने किया अपने अधिकारियों का बचाव 20 रिपब्लिकन सांसदों के रिकॉर्ड मांगे गए सीनेट न्यायिक समिति के अध्यक्ष चक ग्रासले ने बताया कि कुल मिलाकर 20 मौजूदा या पूर्व रिपब्लिकन सांसदों के फोन रिकॉर्ड के लिए समन जारी किए गए थे। वहीं डेमोक्रेट सांसदों ने रिपब्लिकन नेताओं की नाराजगी को गलत बताया। उनका कहना है कि 6 जनवरी 2021 को ट्रंप समर्थकों ने कैपिटल भवन पर हमला किया था, जो लोकतंत्र पर बड़ा हमला था। ऐसे में यह जांच जरूरी था। डेमोक्रेट सीनेटर शेल्डन व्हाइटहाउस ने कहा कि न्याय विभाग की जांच, कैपिटल पर हुए हमले से ज्यादा गंभीर नहीं थी। वहींपूर्व संघीय अभियोजक माइकल रोमानो ने भी कहा कि फोन कॉल के रिकॉर्ड जुटाना किसी भी आपराधिक जांच में सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से रिकॉर्ड जुटाए जाने से कोई नुकसान नहीं हुआ। कंपनियों ने कहा- हमने कानून का पालन किया टेलीकॉम कंपनियों के वकीलों ने सुनवाई में कहा कि उन्होंने सिर्फ कानून का पालन किया। वेरिजोन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी क्रिस मिलर ने कहा कि हमें कानून के तहत यह जानकारी देने के लिए बाध्य किया गया था। हम वैध कोर्ट ऑर्डर को नजरअंदाज नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी बताया कि समन में यह नहीं बताया गया था कि ये नंबर सांसदों के हैं। साथ ही, कोर्ट के आदेश के कारण कंपनी संबंधित नेताओं को पहले से सूचना भी नहीं दे सकती थी। ये भी पढ़ें:-बांग्लादेश चुनाव की तैयारी: आधे से ज्यादा मतदान केंद्र संवेदनशील, कड़ी सुरक्षा के बीच लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा अन्य मोबाइल कंपनियों के बयान भी मिले जुले इसके साथ ही टी-मोबाइल और एटीएंडटी ने भी इसी तरह का बयान दिया। एटीएंडटी के अधिकारी डेविड मैकएटी ने कहा कि एक मामले में उन्होंने विशेष कानूनी सुरक्षा (संविधान की स्पीच या डिबेट क्लॉज) को लेकर सवाल उठाया, लेकिन बाद में अभियोजकों ने वह समन वापस ले लिया। वेरिजोन ने कहा है कि अब से सांसदों से जुड़ी जानकारी देने से पहले कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया जाएगा। जहां संभव होगा, संबंधित सांसद को भी जानकारी दी जाएगी और गोपनीयता आदेश को चुनौती दी जाएगी। अन्य वीडियो

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 11, 2026, 08:39 IST
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