ठंड का कहर: खुले आसमान तले सोने को मजबूर यात्री, 3 लोगों की मौत की आशंका; रोहतक रेलवे स्टेशन पर मिले दो शव
रोहतक मेंकड़ाके की ठंड असर दिखाने लगी है। रेलवे स्टेशन परिसर में दो लोगों और भिवानी रोड स्थित जनसेवा संस्थान में एक बुजुर्ग के शव मिले हैं। आशंका है कि कड़ाके की ठंड के चलते तीनों की मौत हुई है। वहीं, प्रशासन ने पुराने बस स्टैंड, नए बस स्टैंड व गांधी कैंप में पांच रैन बसेरे चालू कर रखे हैं। इसके बावजूद रेलवे स्टेशन पर कोई सूचना पट्ट या बोर्ड तक नहीं लगाया गया है जबकि मंगलवार को तापमान अधिकतम 21 व न्यूनतम 8 डिग्री रहा। पुराना बस स्टैंड का रैन बसेरा रेलवे स्टेशन से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है। अगर यहां सूचना बोर्ड लगा हाेता तो शायद इन लोगों की ठंड से जान न जाती। जीआरपी की महिला एएसआई बबीता ने बताया कि सोमवार रात को सूचना मिली कि रेलवे स्टेशन पर डाउन लाइन के पास 49 साल के व्यक्ति का शव मिला। कहीं चोट का निशान नहीं था जिससे लगे कि ट्रेन की चपेट में आया है। आशंका है कि किसी बीमारी या ठंड के चलते मौत हुई है। गले में पीले रंग की टी-शर्ट, ग्रे रंग की बनियान, स्लेटी रंग का लोअर पहन रखा है। पहचान न होने के कारण शव पीजीआई के डेड हाउस में रखवाया गया है। उधर, स्टेशन पर ही एक अन्य व्यक्ति का शव मिला है। शिनाख्त न होने पर एएसआई राजसिंह ने शव पीजीआई के डेड हाउस में रखवाया है। वहीं, बहुअकबरपुर थाने के हवलदार सुरेंद्र ने बताया कि छह माह पहले जनसेवा संस्थान में 70 साल का बुजुर्ग आकर रहने लगा था। दो दिन पहले ठंड के चलते बीमारी बढ़ गई। गंभीर हालत में पीजीआई लाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मंगलवार को बहुअकबरपुर थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। शहर में तीन जगह बनाए गए हैं पांच रैन बसेरे नगर निगम की ओर से सर्दी में नगर निगम की ओर से तीन जगह रैन बसेरे बनाए गए हैं। इसमें नया बस स्टैंड परिसर में पुरुषों व महिलाओं के लिए अलग-अलग रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, पोर्टा केबिन (पुरुष एवं महिला) के लिए पुराना बस स्टैंड नजदीक पुलिस स्टेशन व सामुदायिक केंद्र गांधी कैंप में भी रैन बसेरा संचालित किया जा रहा है। काम के सिलसिले में रोहतक आए हैं, अभी रेलवे स्टेशन पर पहुंचे हैं। यहां पर रैन बसेरे के लिए कोई भी सूचना बोर्ड नहीं लगा है। मुसाफिरों को रैन बसेरे की जानकारी कैसे मिलेगी। ऐसे में खुले में सोने को मजबूर होना पड़ेगा - मोहन, आगरा निवासी। राजस्थान से रोहतक आए हैं, सुबह लाखनमाजरा जाना है, रात में रेलवे स्टेशन के बाहर ही बिस्तर लगाकर सोना उचित समझा। हालांकि, उन्हें रैन बसेरे की जानकारी मिली है लेकिन यहां सूचना के लिए कोई बोर्ड तक नहीं लगा है।-त्रिलोकी, टीबा बसई, राजस्थान। नगर निगम की ओर से राहगीरों के लिए पांच जगह रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है। इसके लिए कुछ जगह सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। कहीं बोर्ड नहीं हैं तो वहां भी लगाया जाएगा। -डाॅ. आनंद कुमार शर्मा, आयुक्त, नगर निगम।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Dec 17, 2025, 01:20 IST
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