चंडीगढ़ में पेड़ों पर खतरा: प्रूनिंग के नाम पर काटी जा रही पेड़ों की डाल, पर्यावरण विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
चंडीगढ़ सेक्टर-22/23 की डिवाइडिंग रोड पर पेड़ों की हाल की प्रूनिंग ने लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। प्रूनिंग के नाम पर वर्षों पुराने पेड़ों की डालें काट दी गईं, जिससे उनका संतुलन बिगड़ सकता है और वो समय से पहले गिर सकते हैं। कुछ दिन पहले इसी इलाके में एक पेड़ गिर भी चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना प्रशिक्षण वाले लोगों से हो रही गलत छंटाई से चंडीगढ़ की हरियाली खतरे में है। गलत प्रूनिंग से गिर रहे पेड़ विशेषज्ञों के अनुसार शहर के कई पेड़ जो सामान्य परिस्थितियों में 150 से 200 साल तक खड़े रह सकते थे, वे महज 50-60 साल में ही गिरने लगे हैं। इसका मुख्य कारण है पेड़ों की गलत तरीके से और गलत समय पर की जाने वाली प्रूनिंग। पर्यावरण विशेषज्ञ राहुल महाजन का कहना है कि चंडीगढ़ में पेड़ों की छंटाई का काम ज्यादातर अनट्रेंड (अप्रशिक्षित) लोगों से करवाया जा रहा है जिन्हें यह बुनियादी जानकारी नहीं होती कि छंटाई किस हिस्से से और कैसे की जानी चाहिए। गलत तरीके से की गई प्रूनिंग से पेड़ असंतुलित हो जाते हैं और बारिश या आंधी के समय उनका गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एनवायरनमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया (चंडीगढ़) के सचिव एनके झिंगन ने बताया कि पेड़ों की गलत प्रूनिंग तो एक बड़ी समस्या है ही, छंटाई के बाद कटने वाली जगह का ट्रीटमेंट जरूरी होता है लेकिन शहर में इस प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। नतीजतन, कटे हिस्सों से संक्रमण फैलने और दीमक लगने का खतरा बढ़ जाता है जो अंत में पेड़ों की समय से पहले मौत का कारण बनता है। इस मुद्दे पर यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने कहा कि पेड़ों की छंटाई के दौरान सभी नियमों का बखूबी पालन किया जाता है। फिर भी कहीं कोई कमी है तो उसे दूर किया जाएगा।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 11, 2025, 10:05 IST
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