सवाल समाज के ताने-बाने को बचाने का: आत्तिजनक तस्वीरों पर सरकार ने एक्स से मांगा जवाब, जिम्मेदारी समाज की भी है
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुष्परिणामों पर पोथा लिखा जा चुका है। लेकिन साल 2026 की शुरुआत हुई नई तकनीक के पुराने दुरुपयोग से, यानी महिलाओं के चित्रों पर से कपड़े हटवाना और उनको बिकिनी पहना देना। यह सिर्फ हिंदुस्तान में नहीं, पूरी दुनिया में होने लगा। और इस बार इस सामाजिक विकृति के पीछे था-एलन मस्क का नया खिलौना, ग्रोक एआई और ट्वीटर का नया अवतार एक्स। एक्स पर पिछले कुछ दिनों से लगातार महिलाओं की तस्वीरें डाली जा रही हैं और उस पर लिखा जा रहा है कि ग्रोक अपनी तकनीक का प्रयोग करके महिलाओं के कपड़े हटा दे और महिलाओं को बिकिनी पोशाक पहना दे। और ग्रोक यह कर भी रहा है। शुरुआत में तो यह खेल जैसा ही लगा, पर कुछ ही पल में इसके दुरुपयोग को लेकर समाज में सिर्फ चिंता ही पैदा नहीं हुई, बल्कि इस दुरुपयोग को देखा भी गया। पहले बताया गया कि महिलाएं खुद ही अपनी तस्वीरों को बिकिनी में देखना चाहती हैं। बाद में कमेंट्स में लोग अपने हिसाब से महिलाओं की तस्वीरों के वस्त्र बदलने लगे। दुनिया भर में हल्ले के बाद ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क ने संज्ञान तो लिया है, लेकिन वह अधूरा है। वह कहते हैं कि ग्रोक का दुरुपयोग करने वालों के साथ वही होगा, जो बाकी अवैध सामग्री डालने वालों के साथ होता है। मगर आगे सुनिए। वह यह भी कहते हैं कि इन सबके लिए ग्रोक जिम्मेदार नहीं है, बल्कि उसका इस्तेमाल करने वाले लोग हैं। कलम से कुछ खराब लिख दिया जाए, तो दोष कलम का नहीं होता, लिखने वाले का होता है। सतही रूप से देखें, तो बात तार्किक लगेगी। लेकिन कलम का उदाहरण गलत है। कलम अपना दिमाग नहीं लगाती। ग्रोक एक भाषा सीखने का मॉड्यूल है। वह खुद दिमाग लगाता है, इसलिए पाप में भागीदार भी है और मस्क यह न भूलें कि दुरुपयोग रोकना भी उन्हीं की जिम्मेदारी है। एक बड़ा सवाल हमारे समाज और हमारी सरकार से भी है। यह हम होने कैसे दे रहे हैं क्या तकनीक के नाम पर हम कुछ भी स्वीकार कर लेंगे सोचिए जरा, आज यह किसी अनजान महिला की तस्वीर है, जिसे आप वस्त्रहीन होते देख रहे हैं। कल अगर किसी ने आपकी या आपके परिवार की किसी महिला सदस्य की तस्वीर के साथ ऐसा कर दिया, तो जब तक आप यह साबित करेंगे कि यह डीपफेक एआई छवि है, तब तक इसी समाज के लोग उन चीजों की कल्पना कर चुके होंगे, जो सभ्य समाज को नागवार गुजरना चाहिए। आज ग्रोक है, कल कोई और एआई। पिछले वर्ष एक बड़ा बवाल तब उठ खड़ा हुआ था, जब अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो सामने आया। लंदन की किसी मॉडल के तंग कपड़ों के वीडियो पर रश्मिका की तस्वीर डाल दी गई। बवाल हुआ। अमिताभ बच्चन तक हैरान हुए। तब भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग की चर्चा तेज हुई थी। मुझे याद है, मैंने पिछले कई वर्षों से एआई के भयानक दुरुपयोग पर तमाम स्टोरी कीं। जैसे इसके कई एप, जो किसी भी दो तस्वीर को या तो गले लगवा देंगे, या उनसे मार-काट करवा देंगे। याद कीजिए, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का भीमराव आंबेडकर के साथ का एक वीडियो, जिसमें आंबेडकर उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। लेकिन फिर कुछ ही घंटों में एक और वीडियो सामने आया, जिसमें आंबेडकर केजरीवाल को थप्पड़ मारते हुए दिखाई देते हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं। पर एक एआई के एप ने तो मुझे हिला कर रख दिया। इसमें पैसे देकर आप किसी भी दो तस्वीरों को चुंबन करवा सकते हैं। और यह सब खुलेआम हो रहा है। ऐसे एप अपना प्रचार भी करते हैं। एक दौर था फोटोशॉप का, जब यही सब चीज करने के लिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एडोब फोटोशॉप की जरूरत पड़ती थी। समाज में महिलाओं के सम्मान का मखौल आज से नहीं उड़ रहा। लेकिन एक्स पर फैल रही खुली नग्नता इसलिए ज्यादा चिंताजनक और परेशान करने वाली बात है, क्योंकि जो चीज अब तक पर्दे के पीछे ही हो रही थी, अब वह बहुत तेजी से बेरोकटोक व खुलेआम हो रही है। कुछ सेकंडों में हो रही है। और चूंकि यह सब सोशल मीडिया एक्स पर उपलब्ध है, तो तेजी से फैल भी रही है। यह डिजिटल दुराचार से कम नहीं। समाज में कुछ लोग मानसिक रूप से बीमार हैं। ऐसे एप उस बीमारी को और बढ़ावा दे रहे हैं। एआई जैसी तकनीक से हमेशा दो कदम आगे रहना कठिन है, लेकिन नामुमकिन भी नहीं। इस क्षेत्र में बहुत शोध हो रहा है और हम (सरकार तथा सरकार के बाहर) इन पर चर्चा कर भी रहे हैं। लेकिन वक्त है तेजी से काम करने का। इन सब मामलों में इंतजार घातक हो सकता है। हमारे देश के मौजूदा कानून महिला सम्मान की रक्षा करने में सक्षम हैं। एक्स में जो समस्या है, वही समाधान भी है। कौन ग्रोक से सवाल पूछ रहा है और कौन नग्नता फैला रहा है, यह सब खुले में हो रहा है। ऐसे एक्स हैंडल्स के खिलाफ देश के कानून प्रवर्तन तंत्र तुरंत हरकत में आ सकते हैं। जब कार्रवाई त्वरित होगी, तो ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों में कानून का डर बनेगा। घटिया मानसिकता रखने वाले लोगों को यह जताना बहुत जरूरी हो गया है कि महिलाओं का सम्मान करना कोई विकल्प नहीं है, बल्कि अनिवार्य है। कम से कम हरेक नागरिक से इतना तो अपेक्षित ही है कि वह महिलाओं का सम्मान करे। अच्छी बात यह है कि सरकार ने मामले की गंभीरता को समझा है। बीते दो जनवरी को इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने एक्स को एक चिट्ठी भेजी। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 33 (घटनाओं की जानकारी देना) और धारा 111 (साइबर अपराध तथा संगठित अपराध) शामिल हैं। यह चिट्ठी एक्स को उसकी जिम्मेदारी याद दिला रही है। इसमें आईटी एक्ट की उन धाराओं का भी उल्लेख है, जिसमें एक्स को अब तक की सारी तस्वीरों को हटाना होगा और 72 घंटे के भीतर जानकारी देनी होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो विधिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। समस्या यह है कि फेसबुक (मेटा), गूगल व एक्स जैसी कंपनियां कई देशों से बड़ी हो गई हैं। ऐसे में, यदि एक्स व ग्रोक भारत के कानून का पालन नहीं करती, तो क्या भारत एक्स पर यह कार्रवाई करके एक उदाहरण पेश करेगा हमारे नेताओं को और जागरूक होना पड़ेगा। राज्य सभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चिंता व्यक्त करते हुए एक चिट्ठी तो लिखी है, लेकिन यदा-कदा लिखी गई ये चिट्ठियां खानापूर्ति ज्यादा लगती हैं। एआई का दुरुपयोग विपक्ष और सरकार के बीच रस्साकसी का मुद्दा नहीं, समाज के ताने-बाने को बचाने का है। यहां सब की जिमेदारी बनती है। कल को आपके घर परिवार के लोगों के साथ भी ऐसा हो सकता है। नेताओं के साथ भी। इसलिए, एआई पर फैलने वाली इस अश्लीलता पर रोक लगानी ही होगी।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 06, 2026, 08:03 IST
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