Quick Commerce: 10 मिनट में डिलीवरी स्कीम खत्म होने से कंपनियों के मार्जिन पर होगा असर, जानिए UBS ने क्या कहा

ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने क्विक कॉमर्स सेक्टर को लेकर अपने ताजा आकलन में बड़ा संशोधन किया है। बुधवार को जारी रिपोर्ट में यूबएस ने जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी इटरनल के क्विक कॉमर्स से जुड़े ईबीआईटीडीए मार्जिन अनुमानों में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 15-20 फीसदी की कटौती की है। वहीं स्विगी के क्विक कॉमर्स मार्जिन को भी 100-120 आधार अंकों को घटाया गया है। ईबीआईटीडीए, एक लाभप्रदता अनुपात (Profitability Ratio) है जो बताता है कि कंपनी अपने राजस्व (Revenue) के मुकाबले कितनी कमाई कर रही है, ब्याज (Interest), कर (Taxes), मूल्यह्रास (Depreciation) और परिशोधन (Amortization) को छोड़कर ये भी पढ़ें:PMUY:प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से कितने भारतीय परिवारों को मिला लाभ केंद्रीय मंत्री पुरी ने बताए आंकड़े बढ़ती प्रतिस्पर्धा और प्लेटफॉर्म्स पर अधिक छूट का पड़ेगा असर यह संशोधन ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले सरकार ने प्रमुख डिलीवरी एग्रीगेटर्स से अनिवार्य 10 मिनट डिलीवरी डेडलाइन हटाने को कहा था। यूबीएस का कहना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और प्लेटफॉर्म्स पर अधिक छूट के चलते क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मार्जिन रिकवरी अब कुछ तिमाहियों तक टल सकती है। स्विगी ने जीओवी और एनओवी में कोई बदलाव नहीं किया हालांकि, यूबीएस ने यह भी स्पष्ट किया कि स्विगी के ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (जीओवी) और नेट ऑर्डर वैल्यू (एनओवी) के अनुमान मोटे तौर पर जस के तस रखे गए हैं, जबकि इटरनल के जीओवी और एनओवी अनुमानों में हल्की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा, फूड डिलीवरी बिजनेस के लिए वित्त वर्ष 2028 में जीओवी, एनओवी और एडजस्टेड EBITDA के अनुमान भी लगभग अपरिवर्तित रखे गए हैं। इटरनल और स्विगी के लिए नया टारगेट प्राइस कमजोर ईबीआईटीडीए आउटलुक को देखते हुए यूबीएस ने दोनों कंपनियों के शेयरों के लिए अपने टारगेट प्राइस भी घटा दिए हैं। अब इटरनल के लिए नया टारगेट प्राइस ₹375 और स्विगी के लिए ₹510 तय किया गया है। भारतीय क्विक कॉमर्स बाजार सितंबर 2025 से प्रतिस्पर्धा तेज हुई मार्जिन आउटलुक पर यूबीएस ने कहा कि भारतीय क्विक कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा सितंबर 2025 से तेज हुई है और जनवरी 2026 तक बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, डिस्काउंट, चैनल चेक और सेंसर टॉवर के ऐप यूजेज डेटा के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि यह तीव्र प्रतिस्पर्धा सेक्टर में मार्जिन सुधार को और देर से ला सकती है। यूबीएस ने बताया कि क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर डिस्काउंट सितंबर के मुकाबले औसतन 200-300 आधार अंक बढ़ चुके हैं और जनवरी 2026 में यह नवंबर 2025 से भी अधिक हो गए हैं। प्रमुख खिलाड़ियों में अमेजॉन और जेप्टो सबसे ज्यादा डिस्काउंट दे रहे हैं, जबकि ब्लिंकइट अब भी तुलनात्मक रूप से कम डिस्काउंट दे रहा है, हालांकि यह स्तर पहले से अधिक है। फूड डिलीवरी सेगमेंट पर यूबीएस ने कहा कि यहां ग्रोथ में सुधार दिख रहा है और प्रतिस्पर्धा फिलहाल स्थिर बनी हुई है। दिसंबर 2025 के फूड डिलीवरी रिसीट डेटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तीमाही में इंडस्ट्री वॉल्यूम ग्रोथ करीब 16 फीसदी पर ट्रैक कर रही है, जो पिछली तीन तिमाहियों में 7 से 10 फीसदी थी। यूबीएस के अनुसार, यह सुधार कम औसत ऑर्डर वैल्यू वाली पहलों के कारण आया है, जिससे मौजूदा ग्राहकों के बीच उपयोग बढ़ा है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 14, 2026, 14:48 IST
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