शिक्षक और स्नातक एमएलसी: वाराणसी मंडल की दोनों सीटों पर भाजपा की हार, जीत का अंतर बढ़ा; आत्ममंथन की चुनौती

विधानसभा चुनाव से पहले वाराणसी मंडल की शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों पर मिली हार ने भाजपा के सामने संगठनात्मक तैयारियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव से पहले पार्टी ने बूथ स्तर तक बैठकें कीं। कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए बड़े नेताओं के जरिये रणनीति बनाई गई, इसके बावजूद दोनों सीटें सपा के पास चली गईं। स्नातक सीट पर जीत का अंतर 2020 के मुकाबले काफी बढ़ गया, जबकि शिक्षक सीट पर भाजपा के टिकट पर उतरे डॉ. प्रमोद मिश्र अपने पिछले चुनाव के मतों को भी नहीं बचा सके। पिछली बार से 16 हजार मतों का बढ़ा अंतर साल 2020 में सपा के आशुतोष सिन्हा ने केदारनाथ सिंह को 3850 मतों से हराया था। जबकि इस बार आशुतोष सिन्हा ने केदारनाथ सिंह को 19932 वोटों से हराया।यानी पिछली बार के मुकाबले दोनों प्रत्याशियों के बीच अंतर 16082 मत बढ़ा। यह परिणाम केवल हार-जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि इस सवाल को भी सामने रखता है कि पांच साल में भाजपा स्नातक मतदाताओं के बीच अपना समर्थन क्यों नहीं बढ़ा सकी। स्नातक एलएमसी चुनाव में रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, प्रश्नपत्र लीक और उच्च शिक्षा से जुड़े सवाल इस वर्ग के बीच चर्चा में रहते हैं। भाजपा के लिए यह समीक्षा करना अहम होगा कि उसके प्रत्याशी ने शिक्षित युवाओं और अन्य पंजीकृत स्नातकों के साथ मुद्दों पर कितना संवाद किया।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 29, 2026, 23:10 IST
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