Rohtak News: लेक्चरर की नौकरी छोड़ बच्चों के सपनों को उड़ान दे रहीं सुषमा बतरा

करिश्मा रंगारोहतक। समाजसेवा की मिसाल बनीं सुषमा बतरा करीब 22 वर्षों से निशुल्क कोचिंग व ट्यूशन देकर बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रही हैं। लेक्चरर की सरकारी नौकरी छोड़कर समाज हित में जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने का फैसला लिया। यह शुरुआत घर में काम करने वाली सहायिका से किया। अब सहायिका घरों में काम करने के बजाय काउंसलर की जिम्मेदारी निभा रही हैं। यह अकेली छात्रा नहीं बल्कि और भी बेटियां हैं जिनकी शिक्षा की जिम्मेदारी यह संभाले हुए हैं। संवाद न्यूज एजेंसी से हुई बातचीत में सुषमा ने अपने प्रयास साझा किए।शहर की मानसरोवर कॉलोनी में रहने वाली सुषमा ने बताया कि अब 65 की हो चली हूं। रोजाना खुद भी पढ़ती हूं और बच्चों को भी पढ़ने के लिए भी प्रेरित करती हूं। जरूरतमंद बच्चियों को किताबें, नोट्स, निशुल्क चिकित्सा, काउंसिलिंग देने के अलावा अन्य जरूरी जानकारी भी दी जा रही है। संवादविदेश में नाम रोशन कर रहे बच्चेसुषमा ने बताया कि वह लगभग 650 से ज्यादा बच्चों को पढ़ा चुकी हैं। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक हैं। बेटियों पर ही ध्यान ज्यादा रहता है। पढ़ाए गए कई बच्चे डॉक्टर, आईआईटी, वकील होने के साथ विदेशों में भी भविष्य संवार रहे हैं। एक छात्रा तो दुबई में हिंदी शिक्षक हैं। बीए अंग्रेजी ऑनर्स की छात्रा भी विदेश में बस चुकी है। एक छात्रा काउंसलर है। अब दूसरों की परेशानियों का समाधान करने का प्रयास करती हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ समाज के बच्चों को संभालना थोड़ा मुश्किल रहा। इसके लिए परिवार का सहयोग रहा।बच्चियों को पढ़ाने के लिए बेस्ट टीचर का अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिल चुके हैं। यही असली पूंजी व खुशी है। उन्होंने कहा कि असली खुशी तब मिलती है जब किसी बच्चे का जीवन बदलता है। वह अपने सपने पूरे कर आगे बढ़ता है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 26, 2025, 02:33 IST
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