सपोर्टिंग रोल में मिली पहचान, एक्टिंग से दूरी बनाकर चले अध्यात्म की राह, जानें सुरेश ओबेरॉय से जुड़े किस्से

सुरेश ओबेरॉय ने अपने 48 साल के फिल्मी करियर में अधिकतर सहायक भूमिकाएं निभाईं। ऐसा ही एक किरदार निभाकर उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला। आखिर कैसे उनका फिल्मी दुनिया में आना हुआ फिल्मों में आने से पहले वह क्या करते थे क्या उनके अभिनय की विरासत को परिवार के किसी सदस्य ने आगे बढ़ाया है जानिए, सुरेश ओबेरॉय के बारे में कुछ खास बातें। 400 रुपये लेकर मायानगरी आए सुरेश ओबेरॉय आजादी से पहले सुरेश ओबेरॉय का परिवार बलूचिस्तान स्थित क्वेटा में रहता था। एक पंजाबी परिवार में 17 दिसंबर, 1946 को उनका जन्म हुआ। विभाजन के बाद सुरेश का परिवार भारत आ गया। हैदराबाद में सेटल होने के बाद उनके परिवार ने अपनी नई दुनिया बसाई। सुरेश के पिता एक मेडिकल शॉप चलाते थे। सुरेश ओबेरॉय जब बड़े हुए तो पिता के साथ शॉप पर काम करने लगे। लेकिन उनका मन उस काम में नहीं लगता था। ऐसे में वह 400 रुपये लेकर मुंबई चले आए और यहां आकर संघर्ष करने लगे। रेडियो शो और मॉडलिंग में बनाया करियर साल 1970की शुरुआत में सुरेश ओबेरॉय ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में दाखिला लिया। इसके बाद रेडियो में काम किया। साथ ही बतौर मॉडल कई नामी ब्रॉन्ड के लिए काम किया। साल 1970के आखिर तक वह टॉप मॉडल्स बन चुके थे। इसके बाद उन्होंने फिल्मों की तरफ रुख किया।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 17, 2025, 03:04 IST
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