SC: ट्रेनिंग के दौरान दिव्यांग हुए सैन्य अधिकारियों के पुनर्वास का मामला, सरकार को मिली 6 सप्ताह की मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उन अधिकारी कैडेटों के पुनर्वास से जुड़ी सिफारिशें अंतिम रूप देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया, जिन्हें सैन्य प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग होने के कारण बाहर कर दिया गया था। यह मामला सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ा है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि तीनों सेनाओं ने इस मुद्दे पर सकारात्मक सिफारिशें दी हैं, जिन पर रक्षा मंत्रालय विचार कर रहा है। इसके बाद इन पर वित्त मंत्रालय की मंजूरी भी जरूरी होगी। इसी कारण अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी तय की है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर शुरू किया था। अदालत की मदद के लिए नियुक्त न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ वकील रेखा पल्ली ने मेडिकल सहायता, आर्थिक मदद, शिक्षा, पुनर्वास और बीमा से जुड़े सुझाव दिए थे। केंद्र सरकार पहले ही भरोसा दिला चुकी है कि प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग हुए कैडेटों को अब पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के तहत इलाज की सुविधा मिलेगी। अगस्त 2025 से ऐसे सभी कैडेट इस योजना में शामिल कर लिए गए हैं और उनसे एकमुश्त शुल्क भी नहीं लिया जा रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि मौजूदा एकमुश्त आर्थिक मदद और बीमा राशि महंगाई के हिसाब से कम है, इसलिए इसमें बढ़ोतरी पर विचार होना चाहिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 1985 से अब तक करीब 500 अधिकारी कैडेट इस स्थिति का सामना कर चुके हैं, जिनकी आर्थिक और चिकित्सा परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 17, 2025, 06:23 IST
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